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भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को नहीं मिली राहत, UK कोर्ट ने प्रत्यर्पण याचिका दोबारा खोलने से इनकार किया

लंदन हाई कोर्ट ने भारत सरकार के आश्वासनों को पर्याप्त माना

By डॉ. अभिज्ञात

Mar 26, 2026 15:39 IST

नई दिल्लीः ब्रिटेन की अदालत ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की प्रत्यर्पण से जुड़ी याचिका को दोबारा खोलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, लंदन हाई कोर्ट ने यह फैसला भारत सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए लिया।


PNB घोटाले में वांछित नीरव मोदी

नीरव मोदी करीब 13,000 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के मामले में भारत में वांछित हैं। उन्होंने अपनी याचिका में संजय भंडारी के केस का हवाला दिया था। भंडारी मामले में अदालत ने प्रत्यर्पण आदेश को रद्द कर दिया था क्योंकि भारतीय एजेंसियों द्वारा संभावित यातना की आशंका को गंभीर मानवाधिकार मुद्दा माना गया था।


भारत के आश्वासनों पर कोर्ट को भरोसा

लंदन हाई कोर्ट की किंग्स बेंच डिवीजन की पीठ लॉर्ड जस्टिस स्टुअर्ट स्मिथ और जस्टिस जे ने सुनवाई के दौरान कहा कि भारत सरकार की ओर से ‘नोट वर्बेल’ के जरिए दिए गए आश्वासन मजबूत, स्पष्ट और भरोसेमंद हैं। इन्हीं आधारों पर अदालत ने याचिका को फिर से खोलने की अनुमति देने से मना कर दिया। अदालत ने अपने निर्णय में यह भी उल्लेख किया कि 2022 में जब नीरव मोदी का मामला उनके सामने आया था, तब भंडारी केस से जुड़ी अहम सामग्री या तो उपलब्ध नहीं थी या अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई थी। बाद में आए फैसले में हिरासत में कथित दुर्व्यवहार को लेकर चिंताजनक स्थिति सामने आई, जिसे कुछ मामलों में सामान्य और व्यापक बताया गया।

पीठ ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि मुंबई में जेल से अदालत तक ले जाते समय नीरव मोदी को यातना या किसी तरह के दुर्व्यवहार का वास्तविक खतरा है। अदालत ने कहा कि उसने भारत सरकार द्वारा दिए गए सभी आश्वासनों की गंभीरता से जांच की है।


भारत-ब्रिटेन रिश्तों और कानूनी भरोसे का हवाला

फैसले में कहा गया कि भारत और ब्रिटेन जैसे मित्र देशों के बीच पारस्परिक विश्वास और कानूनी समझौते महत्वपूर्ण हैं और ऐसे ढांचे में दिए गए औपचारिक आश्वासनों को विशेष महत्व दिया जाना चाहिए। हालांकि अदालत ने यह भी माना कि बचाव पक्ष के वकील द्वारा पेश कुछ तर्कों में यह चिंता जताई गई कि कुछ गवाहों ने पहले हिरासत में दुर्व्यवहार को नजरअंदाज किया था।


आर्थर रोड जेल और सुविधाओं का पूरा खाका

अंततः अदालत ने माना कि भारत सरकार के आश्वासन सामान्य या अस्पष्ट नहीं हैं बल्कि स्पष्ट, विशिष्ट और लागू करने योग्य हैं। गृह मंत्रालय की ओर से यह भी बताया गया कि नीरव मोदी को मुंबई की आर्थर रोड जेल में किन परिस्थितियों में रखा जाएगा, उन्हें कौन-कौन सी सुविधाएं मिलेंगी और मुकदमे के दौरान उन्हें किस प्रकार की कानूनी सहायता दी जाएगी।अदालत ने यह भी कहा कि ये आश्वासन ऐसे अधिकारी द्वारा दिए गए हैं, जो भारत सरकार, महाराष्ट्र राज्य और इस मामले से जुड़ी पांच जांच एजेंसियों को बाध्य करने का अधिकार रखते हैं।


यातना पर कानून और कूटनीतिक असर का जिक्र

अदालत ने यह स्पष्ट किया कि भले ही भारत संयुक्त राष्ट्र के ‘यातना विरोधी कन्वेंशन’ का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है लेकिन उसे इस बात पर संदेह नहीं है कि भारतीय कानून के तहत यातना की अनुमति नहीं है। अदालत के अनुसार इन आश्वासनों का कूटनीतिक महत्व भी है और यदि इनका उल्लंघन होता हैॉ तो इससे भारत और ब्रिटेन के बीच विश्वास और संबंधों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।


CBI की अहम भूमिका और कानूनी लड़ाई

इस पूरे मामले में सीबीआई ने अहम भूमिका निभाई। क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के वकील के साथ मिलकर सीबीआई टीम ने अदालत में नीरव मोदी की याचिका का जोरदार विरोध किया। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारियों सहित सीबीआई की टीम लंदन में मौजूद रही। सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि यह याचिका भंडारी केस के फैसले के आधार पर दायर की गई थी, लेकिन एजेंसी के समन्वित और निरंतर प्रयासों से इस चुनौती को सफलतापूर्वक पार किया गया।


2018 से जारी है प्रत्यर्पण प्रक्रिया

सीबीआई 2018 से ही नीरव मोदी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में लगी हुई है। 2019 में गिरफ्तारी के बाद से यूके की अदालतें पहले ही उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे चुकी हैं और उनकी पूर्व अपीलों को भी खारिज किया जा चुका है। अदालतों ने यह भी माना है कि भारत में उनके साथ उचित व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त आश्वासन दिए गए हैं।


2019 से UK जेल में बंद हैं नीरव मोदी

नीरव मोदी 19 मार्च 2019 से यूके की जेल में बंद हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि उन्होंने अपने मामा मेहुल चोकसी के साथ मिलकर इस बड़े बैंक घोटाले को अंजाम दिया। बताया जाता है कि उन्होंने अकेले लगभग 6,498.20 करोड़ रुपये की राशि का गबन किया।

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