कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने महंगाई भत्ते (Dearness Allowance-DA) के बकाया भुगतान को जल्दी निपटाने के लिए शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। गृह और पहाड़ी मामलों के विभाग के अकाउंट्स ऑफिस को 28 और 29 मार्च (शनिवार और रविवार) को खुला रखने का आदेश जारी किया गया है। इसका उद्देश्य लंबित फाइलों और भुगतान के मामलों को समय पर पूरा करना है ताकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को जल्द से जल्द उनकी बकाया राशि मिल सके।
वीकेंड में भी जारी रहेगा काम
सरकारी ज्ञापन में कहा गया है कि अकाउंट्स ऑफिस के सभी अधिकारी और कर्मचारी इन दोनों दिनों में कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। इससे लंबित कार्यों की प्रोसेसिंग तेजी से पूरी की जा सकेगी और मार्च के अंत तक पहली किस्त समय पर जारी की जा सकेगी। आमतौर पर वीकेंड में यह कार्यालय बंद रहता है, लेकिन इस बार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनजर विशेष रूप से खुला रखने का निर्णय लिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने 5 फरवरी 2026 को दिए गए फैसले में स्पष्ट किया था कि 2008 से 2019 तक का डीए (DA) बकाया कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार वित्तीय कारणों का हवाला देकर इसे रोक नहीं सकती। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि कुल बकाया राशि का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा मार्च 2026 के अंत तक जारी किया जाए। इस फैसले से लगभग 20 लाख कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को फायदा मिलेगा। कोर्ट ने आरओपीए 2009 नियमों के अनुसार ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (एआईसीपीआई) के आधार पर डीए (DA) की गणना करने का भी आदेश दिया।
किस्तों में होगा भुगतान
पश्चिम बंगाल सरकार ने डीए (DA) बकाया (अप्रैल 2008 से दिसंबर 2019 तक) को कई चरणों में देने की योजना बनाई है। पहले चरण में जनवरी 2016 से दिसंबर 2019 तक का बकाया दो किस्तों में दिया जाएगा—पहली किस्त मार्च 2026 में और दूसरी सितंबर 2026 में। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 15 मार्च 2026 को घोषणा की थी कि कर्मचारियों, शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मार्च 2026 से आरओपीए 2009 के तहत डीए (DA) बकाया मिलने लगेगा। अनुमानित राशि लगभग 10,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत
इस कदम से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को लंबे समय से लंबित बकाया मिलने की उम्मीद जगी है। वर्तमान में राज्य कर्मचारियों को 22 प्रतिशत डीए (DA) मिलता है, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को लगभग 58 प्रतिशत डीए मिलता है। यही अंतर लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। कर्मचारी संगठनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है और साथ ही शेष बकाया राशि की शीघ्र अदायगी की मांग की है।
सरकार का प्रयास है कि अकाउंट्स ऑफिस की वीकेंड में कार्य करने की व्यवस्था से पहली किस्त तय समय पर जारी हो। इससे न केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन होगा, बल्कि कर्मचारियों के वित्तीय बोझ को भी कम करने में मदद मिलेगी।