सोमवार को पूरे दिन चुनाव आयोग द्वारा जारी किए जाने वाले पहले सप्लिमेंट्री लिस्ट का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था। आयोग की घोषणा के मुताबिक इसे सोमवार (23 मार्च) की रात को 9 बजे जारी किया जाना था लेकिन इसे देर रात को 11.55 बजे जारी किया गया।
चुनाव आयोग के वेबसाइट पर मतदाता सूची का सप्लिमेंट्री लिस्ट को अपलोड किया गया। आयोग ने जब अंतिम मतदाता सूची जारी की थी तब करीब 60 लाख लोग ऐसे थे जिनके नाम के साथ 'विचाराधीन' लिखा हुआ था। अभी तक लगभग 29 लाख लोगों के मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
कितने लोगों का नाम हटाया गया है?
सोमवार की देर रात को जारी सप्लिमेंट्री सूची से इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है कि कितने लोगों का नाम हटाया गया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार कितने लोगों का नाम हटा है इस बाबत मंगलवार को जानकारी मिल सकेगी। पर सोमवार की शाम से रात और देर रात तक क्यों सप्लिमेंट्री सूची के जारी होने का इंतजार करना पड़ा?
आयोग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 'विचाराधीन' मामलों का निपटारा करने के बाद कम से कम 50 प्रतिशत मामलों में न्यायाधीश ई-साइन करके नहीं भेजे थे। इसलिए सप्लिमेंट्री मतदाता सूची में उन नामों को शामिल करने को लेकर थोड़ी समस्या पैदा हो गयी थी। बाद में समस्या का समाधान कर पहली सप्लिमेंट्री लिस्ट और डिलिटेशन लिस्ट को जारी किया गया।
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जानकारी के अनुसार 705 न्यायाधीश यानी ज्यूडिशियल अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया में काम कर रहे हैं। उन्होंने सूची में अपना ई-साइन करके भेजा जिसके बाद चुनाव आयोग ने सूची को जारी किया। CEO मनोज अग्रवाल ने कहा कि सूची को तैयार करने में 6 से 8 घंटों का समय लगता है। जिन नामों का निपटारा हो गया है उसकी लिस्ट मिलने के बाद इसे चुनाव आयोग के वेबसाइट पर जारी किया गया। DEO आज यानी मंगलवार से अपने-अपने क्षेत्र के मतदान केंद्र पर इस सूची को टांग देंगे ताकि मतदाता अपना-अपना नाम इस लिस्ट में ढूंढ सकें।
कब से नाम जोड़ने का आवेदन कर सकेंगे?
जिन लोगों का नाम डिलिटेशन लिस्ट में रखा गया है वैसे लोग कब ट्राईब्यूनल के पास कब से आवेदन कर सकेंगे? कब से आवेदन की यह प्रक्रिया शुरू होगी? मिली जानकारी के अनुसार संबंधित ट्राइब्यूनल के गठन को लेकर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया जा रहा है।
जिला स्तर पर ट्राईब्यूनल के गठन के लिए 19 न्यायाधीशों का नाम कलकत्ता हाईकोर्ट में भेजा तो गया था लेकिन कहीं भी इसका गठन नहीं हुआ है। सोमवार को इसके गठन के लिए मुख्यसचिव को CEO ने पत्र लिखा है। पत्र में ऑफिस के लिए जल्द से जल्द मकान ढूंढने के लिए कहा गया है। CEO का कहना है कि हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द ट्राईब्यूनल का काम शुरू हो जाए।