मुंबई: बॉम्बे हाईकोर्ट ने वाणिज्य नगरी के सभी हॉकर्स और उनके हेल्पर्स की पहचान की जांच करने के लिए बृहन्मुंबई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन बीएमसी को निर्देश दिया। कई बांग्लादेशी और अन्य देशों से अवैध रूप से भारत में आए लोग मुंबई में हॉकरी कर रहे हैं, जिससे स्थानीय हॉकर्स को असुविधा हो रही है और सुरक्षा बाधित हो रही है, इस शिकायत को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी। उसी के परिप्रेक्ष्य में सोमवार को न्यायमूर्ति अजय एस गडकरी और न्यायमूर्ति कमल आर खट्टर की पीठ ने हॉकर्स की पहचान जांचने का निर्देश जारी किया। अवैध हॉकर्स के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने में विफल रहने पर संबंधित सरकारी अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे, ऐसी कड़ी चेतावनी भी हाईकोर्ट ने दी है।
अदालत का कहना है, मुंबई में बीएमसी और पुलिस को जो भी व्यक्ति फुटपाथ पर हॉकरी करते हैं, दुकान चलाते हैं या हॉकर्स के सहायक के रूप में काम करते हैं, उनकी पहचान विस्तार से जांचनी होगी। बांग्लादेशी, अवैध रूप से मुंबई में रहने वाले विदेशी या स्थानीय, सभी हॉकर्स की पहचान जांचना अनिवार्य है। यदि पाया जाता है कि कोई हाॅकर अवैध घुसपैठिया है, तो कानून के अनुसार उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित प्राधिकरण की मदद से इन घुसपैठियों को वापस भेजा जाएगा।
2014 के स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के अनुसार, हर पांच साल में राज्य सरकार या नगर निगम की ओर से हॉकर्स का सर्वे करना अनिवार्य है। शहरी स्ट्रीट वेंडर्स की सुरक्षा देने और हॉकरी को नियंत्रित रखने के लिए इस कानून का लागू होना जरूरी है लेकिन मुंबई सहित देश के कई शहरों में यह कानून बहुत धीमी गति से लागू हुआ है। प्रशासन और हॉकर्स के बीच विवाद के कारण मुंबई में इस कानून का लागू होना लगभग सात साल तक रुका रहा।
बॉम्बे हाईकोर्ट के सोमवार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए समय मांगते हुए स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट पर स्थगन आदेश को और दो हफ्ते बढ़ाने की मांग हॉकर्स के वकील ने की थी लेकिन उस मांग को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने साफ कर दिया, विभिन्न याचिकाओं और कानूनी जटिलताओं के कारण आज तक स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट लागू नहीं किया जा सका। आजाद हॉकर्स केस में अदालत का फैसला आने के बाद भी कोर्ट के गाइडलाइन और निर्देशों का पालन नहीं किया गया इसलिए हम स्थगन अवधि और नहीं बढ़ाएंगे।
हालांकि हाईकोर्ट के इस निर्देश के लागू होने पर मुंबई में हॉकरी पर बड़ा असर पड़ेगा। अवैध रूप से फुटपाथ कब्जा करना, सड़क घेरकर ट्रैफिक जाम पैदा करने जैसी शिकायतों को लेकर हाल ही में अवैध हॉकर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है लेकिन हाईकोर्ट के इस आदेश को बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कड़ा कदम माना जा रहा है। मुंबई के कई लोगों का भी कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में अवैध हॉकर्स की संख्या जिस तरह बढ़ी है, उसमें स्थानीय लोगों की सुरक्षा के लिए उनकी पहचान की जांच जरूरी है।