चुनाव आयोग द्वारा जारी विज्ञप्ति में भाजपा का कमल छाप! चुनाव से संबंधित आयोग की एक विज्ञप्ति में भाजपा का चुनाव चिन्ह 'कमल छाप' स्पष्ट नजर आ रहा है। इस बात को लेकर तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ने चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया है। अपने आधिकारिक X हैंडल पर एक पोस्ट कर उन्होंने इस विज्ञप्ति को शेयर किया है।
इस पोस्ट में अभिषेक बनर्जी ने लिखा है कि इसी वजह से न्यायिक अधिकार को धीरे-धीरे कमजोर कर दिया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के निर्वाचन पैनल से भारत के मुख्य न्यायाधीश को हटा दिया गया है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो वह दिन ज्यादा दूर नहीं जब सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर राजनीति का ठप्पा रहेगा।
SIR के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस बार-बार यह शिकायत दर्ज करवा रही है कि चुनाव आयोग भाजपा के लिए 'Team B' की तरह काम कर रही है। मंगलवार को अपने पोस्ट के जरिए अभिषेक बनर्जी ने पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर से चुनाव आयोग की निरपेक्षता और स्वीकार्यता को लेकर सवाल उठाया है।
इस बीच साल 2019 का एक पत्र सामने आया है जिसे दिल्ली स्थित मुख्य चुनाव आयोग के ऑफिस से जारी किया गया है। यह पत्र राज्य व केंद्रशासित क्षेत्रों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजा गया था। इस पत्र के एकदम नीचे 'भारतीय जनता पार्टी, केरल' लिखा हुआ है और साथ में कमल के फूल का चिन्ह भी बना हुआ है।
This is precisely why judicial authority was diluted and the Chief Justice of India was removed from the CEC selection panel. If this trajectory continues, it wont be long before Supreme Court judgments appear politically stamped.
— Abhishek Banerjee (@abhishekaitc) March 24, 2026
Those sworn to protect the Constitution are pic.twitter.com/BzFVXMugVd
इस पत्र को लेकर चुनाव आयोग का दावा है कि यह क्लरिकल गलती है। आयोग का कहना है कि हाल ही में भाजपा की केरल शाखा की ओर से साल 2019 के प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड के संबंध में निर्देशिका को लेकर जानकारी के लिए एक आवेदन किया गया था। आवेदन के साथ उन्होंने जो पुरानी विज्ञप्ति की फोटोकॉपी जमा की थी, उसपर भाजपा का मुहर लगा था। लापरवाही की वजह से गलती से भाजपा का मुहर लगी वह विज्ञप्ति ही दूसरे राजनीतिक पार्टियों को भेज दिया गया था।
हालांकि पुराना पत्र होने के बावजूद विपक्ष इतनी आसानी से इस मुद्दे को नहीं छोड़ना चाहती है। भले ही यह गलती से, लापरवाही की वजह से अथवा किरानी की गलती से ही हुई थी लेकिन यह घटना घटी जरूर थी, इसे चुनाव आयोग ने स्वीकार किया है। अगर सच में यह गलती से ही हुई थी तो ऐसी 'गलती' आखिर हुई कैसे? इसे लेकर सवाल उठाया जा रहा है।