गुवाहाटीः करीब 200 वर्षों से चाय बागानों में काम कर रहे श्रमिकों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। अब उन्हें अपनी ज़मीन पर घर बनाने का अधिकार मिलना शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई इस पहल से हजारों परिवारों का वर्षों पुराना सपना पूरा हो रहा है।
असम के जोरहाट जिले के रहने वाले जगदू दुसाध बताते हैं कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से चाय बागानों में काम करता रहा है, लेकिन आज तक उनके पास अपनी ज़मीन नहीं थी। अब पहली बार उन्हें अपने घर के लिए ज़मीन का अधिकार मिला है, जिससे उनका सपना साकार हो गया।
चाय श्रमिक संगठनों के अनुसार बड़ी संख्या में कामगारों को इस योजना का लाभ मिल चुका है, जबकि कुछ अभी भी प्रक्रिया में हैं। जिन लोगों को अभी तक अधिकार नहीं मिला है, वे भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जल्द ही उन्हें भी अपनी ज़मीन मिल जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद यह कदम श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण न्याय जैसा है। सरकार का लक्ष्य लाखों चाय बागान श्रमिकों को इस योजना के दायरे में लाना है।
हालांकि जमीन मिलने के बावजूद कई चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं। श्रमिकों की दैनिक मजदूरी बहुत कम है, जिससे उनका जीवनयापन कठिन हो जाता है। खासकर महिला श्रमिकों ने बताया कि उन्हें मिलने वाली कमाई उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
इसके अलावा, रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ें देने के जो वादे किए जाते हैं, वे अक्सर ज़मीन पर पूरे होते नहीं दिखते। इस कारण श्रमिकों को अभी भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान हजारों श्रमिकों को भूमि अधिकार के दस्तावेज़ सौंपे गए, जिसे इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।