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मानवाधिकार उल्लंघनः अंतरराष्ट्रीय मंच पर घिरा पाकिस्तान, जीएसपी प्लस व्यापारिक सुविधा पर पुनर्विचार की अपील

पाकिस्तान में मानवाधिकार स्थिति पर बढ़ती वैश्विक चिंता, यूरोपीय संघ पर व्यापारिक दबाव बनाने की मांग

By डॉ. अभिज्ञात

Mar 28, 2026 20:41 IST

जिनेवाः स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 61वें सत्र के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में पाकिस्तान वर्ल्ड अलायंस की प्रतिनिधि डॉ. सुमरन रज़ाक सबरीना ने पाकिस्तान के मानवाधिकार हालात पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने यूरोपीय संघ से पाकिस्तान को मिले विशेष व्यापारिक लाभ की समीक्षा करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि इस विशेष व्यापारिक व्यवस्था के तहत पाकिस्तान पर जो मानवाधिकार संबंधी जिम्मेदारियां हैं, उन्हें पूरा नहीं किया जा रहा है। उन्होंने यूरोपीय संघ और यूरोपीय संसद से अपील की कि जब तक वास्तविक सुधार नहीं दिखते, तब तक इस व्यापारिक सुविधा को निलंबित करने पर विचार किया जाए।

सबरीना ने फरवरी 2024 के आम चुनावों को लेकर भी सवाल उठाए और यूरोपीय संघ की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। उनका कहना था कि चुनावों की निष्पक्षता पर तब संदेह पैदा हुआ जब राष्ट्रमंडल के एक पर्यवेक्षक की रिपोर्ट सामने आई, जिसमें गड़बड़ियों के संकेत दिए गए थे।

उन्होंने पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, आवाजाही और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकारों पर भी चिंता जताई। साथ ही, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की हिरासत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उन्हें लंबे समय से एकांत में रखा गया है और उन्हें पर्याप्त इलाज नहीं मिल रहा।

अपने निजी अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उनके पिता, जो मानवाधिकार कार्यकर्ता थे, 2019 में लापता हो गए थे और बाद में उनके हिरासत में होने की पुष्टि हुई। उनके अनुसार, उन्हें यातनाएं दी गईं और एक बंद सैन्य अदालत में सजा सुनाई गई। उनके पिता को जेल में उचित इलाज, दवाइयां और परिवार से संपर्क जैसी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे परिवार को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सबरीना ने पाकिस्तान से तुर्की के रास्ते यूरोप जाने वाले प्रवास के मुद्दे को भी उठाया और कहा कि इस पहलू को भी व्यापारिक दर्जे की समीक्षा में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने अल्पसंख्यकों की स्थिति और ईशनिंदा कानूनों को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि इन क्षेत्रों में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।

उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य पाकिस्तान को सजा दिलाना नहीं, बल्कि सुधार के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने यूरोपीय संघ से अपील की कि वह अपने प्रभाव का उपयोग कर पाकिस्तान पर सुधार के लिए दबाव बनाए, ताकि वहां मानवाधिकार और राजनीतिक स्वतंत्रता मजबूत हो सके।

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