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“सरकार में ‘राष्ट्र पहले’ की भावना नहीं”- कपिल सिब्बल का मोदी सरकार पर तीखा हमला

तेल आयात, महंगाई और कम रणनीतिक भंडार को लेकर जताई चिंता। सरकार की तैयारी पर उठाए सवाल।

By श्वेता सिंह

Mar 28, 2026 21:54 IST

नई दिल्लीः पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर देश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि इस संकट का सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ेगा, लेकिन सरकार इसकी गंभीरता को ठीक से नहीं समझ रही।

भारत क्यों है सबसे ज्यादा प्रभावित?

सिब्बल ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 88-89 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है। इसमें से करीब 50-55 प्रतिशत तेल मध्य पूर्व से आता है और यह आपूर्ति हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होती है। उन्होंने बताया कि भारत हर दिन करीब 5.5 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से 2.5 से 2.8 मिलियन बैरल मध्य पूर्व से आता है। अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है या रास्ता बाधित होता है, तो भारत पर सीधा असर पड़ेगा। सिब्बल के अनुसार, मौजूदा हालात में कच्चे तेल की कीमतें 110-120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो सामान्य से काफी ज्यादा हैं। इसका मतलब है कि भारत का आयात बिल बढ़ेगा और इसका बोझ आम लोगों पर पड़ेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे महंगाई बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था पर दबाव आएगा।

जरूरी चीजों की सप्लाई पर खतरा

सिब्बल ने कहा कि सिर्फ तेल ही नहीं, बल्कि कई जरूरी चीजें जैसे एलएनजी, एलपीजी, सल्फर, हीलियम और कृषि के लिए जरूरी यूरिया भी मध्य पूर्व से आता है। उन्होंने बताया कि यूरिया पहले ही करीब 50 प्रतिशत महंगा हो चुका है। अगर हालात और बिगड़े, तो इन चीजों की कमी हो सकती है। इससे बाजार में जमाखोरी, कालाबाजारी और लंबी कतारों जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

सिब्बल ने “स्टैगफ्लेशन” का खतरा भी जताया-यानी एक साथ महंगाई बढ़ना और आर्थिक विकास धीमा होना। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में ब्याज दरें बढ़ सकती हैं और विदेशी निवेश भी कम हो सकता है।

रणनीतिक भंडार पर बड़ा सवाल

सिब्बल ने सरकार की तैयारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत के पास रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बहुत कम है। उनके मुताबिक, देश के पास सिर्फ लगभग 9.5 दिनों का ही तेल भंडार है और वह भी पूरी तरह भरा नहीं है। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि: चीन के पास 100-120 दिनों का भंडार है। जापान के पास 200-260 दिनों का। दक्षिण कोरिया के पास 200-210 दिनों का भंडार है। उन्होंने पूछा कि अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो जाता है, तो भारत क्या करेगा?

सरकार पर सीधा आरोप

सिब्बल ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार “राष्ट्र पहले” की सोच से काम नहीं कर रही, बल्कि उसका ध्यान सिर्फ चुनाव जीतने पर है। उन्होंने यह भी कहा कि संकट के समय “टीम इंडिया” की बात की जाती है, लेकिन बाकी समय विपक्ष को साथ लेकर चलने की कोशिश नहीं होती। सिब्बल ने सुझाव दिया कि भारत को अपने हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) से सीधे बात करनी चाहिए और यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस संघर्ष से भारत को नुकसान हो रहा है।

सरकार की ओर से क्या कहा गया?

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखना है। उन्होंने राज्यों से कहा है कि वे जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर सख्ती करें और लोगों के बीच किसी तरह की अफवाह न फैलने दें।

कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया का संकट भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। तेल की कीमतों से लेकर जरूरी सामान की उपलब्धता तक, कई स्तरों पर असर दिख सकता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और विपक्ष को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि इस संकट का असर आम लोगों पर कम से कम पड़े।

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