वाशिंगटनः सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर हुए ताजा हमले में ईरान ने मिसाइलों और ड्रोन से निशाना साधा, जिससे कई अमेरिकी सैनिक घायल हो गए। यह एयरबेस सऊदी राजधानी रियाद से करीब 96 किलोमीटर दूर है और इसका इस्तेमाल सऊदी वायुसेना के साथ-साथ अमेरिकी सैनिक भी करते हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से यह लगातार निशाने पर रहा है। इस घटना ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव को और बढ़ा दिया है।
जानकारी के मुताबिक इस हमले में कम से कम 15 अमेरिकी सैनिक घायल हुए, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। इससे पहले भी इसी सप्ताह इस एयरबेस पर हमले हुए थे, जिनमें कई सैनिक जख्मी हुए थे।
अब तक इस संघर्ष में घायल अमेरिकी सैनिकों की संख्या 300 के पार पहुंच चुकी है। हालांकि अधिकांश सैनिक इलाज के बाद फिर से ड्यूटी पर लौट चुके हैं, लेकिन कुछ अब भी गंभीर हालत में हैं और सेवा से बाहर हैं।
इस बीच अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत बढ़ानी शुरू कर दी है। जापान से रवाना हुआ एक नौसैनिक जहाज, जिसमें लगभग 2500 मरीन सैनिक सवार हैं, पश्चिम एशिया पहुंच चुका है। इसके अलावा अन्य युद्धपोतों और सैन्य टुकड़ियों को भी तैनात किया जा रहा है।
इससे पहले ही अमेरिका यहां पिछले 20 वर्षों का सबसे बड़ा सैन्य जमावड़ा कर चुका था, जिसमें दो विमानवाहक पोत, कई युद्धपोत और करीब 50,000 सैनिक शामिल हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका अपने उद्देश्यों को बिना जमीनी सेना भेजे भी हासिल कर सकता है, लेकिन हालात के अनुसार सभी विकल्प खुले रखने होंगे।
इस संघर्ष में अब तक कई सैनिकों की जान जा चुकी है। एक अमेरिकी सैनिक, बेंजामिन पेनिंगटन, हमले में घायल होने के बाद कुछ दिनों बाद दम तोड़ बैठा। ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच जारी इस टकराव का असर वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल रहा है। हवाई यात्रा प्रभावित हुई है, तेल निर्यात में बाधा आई है और ईंधन की कीमतों में उछाल देखा गया है। खासतौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ ने आर्थिक दबाव को और बढ़ा दिया है।
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर संकट को खत्म करने का दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने ईरान को 6 अप्रैल तक जलडमरूमध्य खोलने का अल्टीमेटम दिया है, जबकि ईरान ने किसी भी तरह की बातचीत से इनकार किया है।