वाशिंगटनः अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच 28 फरवरी 2026 को शुरू हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने युद्ध से पहले पांच प्रमुख उद्देश्य तय किए थे: ईरान की मिसाइल क्षमता को नष्ट करना, रक्षा उद्योग और हथियार उत्पादन को कमजोर करना, ईरान की नौसेना और वायुसेना को निष्क्रिय करना, परमाणु कार्यक्रम को रोकना और मध्य पूर्वी सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना। व्हाइट हाउस का दावा है कि अधिकांश सैन्य लक्ष्य हासिल हो चुके हैं, लेकिन कई रणनीतिक मुद्दे अभी अधूरे हैं।
मिसाइल और रक्षा उद्योग पर दबाव
ट्रम्प प्रशासन के मुताबिक, अब तक ईरान की 90 प्रतिशत मिसाइलें और लॉन्चर नष्ट हो चुके हैं। ड्रोन और मिसाइल निर्माण की फैक्टरियां भी प्रभावित हुई हैं। इसके बावजूद ईरान की ओर से खाड़ी देशों और इजराइल पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी हैं। दूसरा लक्ष्य, ईरान के रक्षा उद्योग को कमजोर करना, भी आंशिक रूप से सफल रहा। पेंटागन और इजराइली हमलों में हथियार उत्पादन और मिसाइल फैक्टरियों को निशाना बनाया गया। याज्द की एक प्रमुख सैन्य सुविधा पर हमले ने ईरान की उत्पादन क्षमता को बड़ा झटका दिया।
नौसेना और वायुसेना: अमेरिका का वर्चस्व, खतरा बना हुआ
ईरान की नौसेना और वायुसेना को निष्क्रिय करना तीसरा लक्ष्य था। अमेरिका और इजराइल ने हवाई वर्चस्व जल्दी हासिल कर लिया। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुसार, 150 से अधिक ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाया गया या नष्ट किया गया। हालांकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग अब भी प्रभावित हो रही है और ईरान की क्रांतिकारी गार्ड की छोटी नौकाएं खतरा बने हुए हैं। कुछ ईरानी जहाजों ने श्रीलंका और भारत की ओर रुख किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में तनाव अभी कम नहीं हुआ है।
परमाणु कार्यक्रम: सफलता आंशिक, जोखिम कायम
चौथा और सबसे संवेदनशील लक्ष्य था ईरान को परमाणु हथियार तक पहुंचने से रोकना। अमेरिका और इजराइल ने अराक का हेवी वॉटर प्लांट और याज्द का येलोकेक संयंत्र निशाना बनाया। फिलहाल ईरान के पास लगभग 970 पाउंड संवर्धित यूरेनियम बचा हुआ है। ट्रम्प प्रशासन अब इसे अमेरिका लाने की तैयारी में है, लेकिन बिना ईरान की अनुमति यह बेहद जोखिम भरा मिशन है, जिसमें जमीनी सैन्य कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है।
मध्य पूर्व में दबदबा और अधूरे रणनीतिक लक्ष्य
पांचवां लक्ष्य मध्य पूर्वी सहयोगियों – इजराइल, सऊदी अरब, कतर और यूएई – की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ट्रम्प ने संकेत दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा अब क्षेत्रीय देशों की जिम्मेदारी होगी। शासन परिवर्तन और प्रॉक्सी समूहों पर नियंत्रण के लक्ष्य आंशिक रूप से ही पूरे हुए हैं। ईरान के शीर्ष नेतृत्व को नुकसान जरूर हुआ, लेकिन अभी भी बातचीत और दबाव के मुद्दे लंबित हैं।
सैन्य सफलता, रणनीतिक चुनौती
एक महीने में ट्रम्प प्रशासन ने सैन्य बढ़त हासिल की है और ईरान पर दबाव बनाया है। लेकिन कई रणनीतिक लक्ष्य अभी अधूरे हैं। वैश्विक तेल कीमतों में उथल-पुथल और मध्य पूर्व में अनिश्चितता यह दिखाती है कि ट्रम्प की आक्रामक रणनीति अभी पूर्ण रूप से सफल नहीं हुई है। यह स्पष्ट है कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी न केवल सैन्य अभियान है, बल्कि मध्य पूर्व में अमेरिकी प्रभुत्व और वैश्विक सुरक्षा पर भी असर डालने वाला बड़ा रणनीतिक खेल है।