दुबई: पश्चिम एशिया में जारी टकराव ने एक और गंभीर मोड़ ले लिया है। इजरायल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अहम ठिकानों पर हमला किया है। ईरान के सरकारी मीडिया के अनुसार अराक स्थित शाहिद खोन्दाब हेवी वॉटर कॉम्प्लेक्स और यज़्द प्रांत के अर्दकान येलोकेक उत्पादन संयंत्र को निशाना बनाया गया। इन हमलों के बाद क्षेत्र में पहले से चल रहा तनाव और बढ़ गया है।
ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने कहा कि हमलों में किसी की जान नहीं गई और न ही किसी तरह के रेडिएशन फैलने का खतरा है। अधिकारियों के अनुसार अराक का संयंत्र पहले से ही निष्क्रिय था, क्योंकि उस पर पिछले वर्ष भी हमला हो चुका था। इसके बावजूद इस कार्रवाई को ईरान के परमाणु ढांचे पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। दूसरी ओर इजरायल का दावा है कि इन हमलों से ईरान की परमाणु क्षमता और मिसाइल निर्माण ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा है।
जवाबी कार्रवाई के संकेत
हमले के तुरंत बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठन से जुड़े अधिकारियों ने साफ संकेत दिया है कि इस बार जवाब पहले से अधिक कठोर हो सकता है। IRGC के एयरोस्पेस कमांडर ने चेतावनी दी कि इजरायल ने हालात को और भड़काया है और अब प्रतिक्रिया पहले जैसी सीमित नहीं होगी। साथ ही अमेरिका और इजरायल से जुड़े संस्थानों में काम करने वालों को सतर्क रहने की सलाह भी दी गई है।
संघर्ष का फैलता दायरा
यह टकराव अब सिर्फ ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरे क्षेत्र में दिख रहा है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल की ओर से तेहरान और पश्चिमी ईरान में मिसाइल निर्माण और भंडारण से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहीं ईरान लगातार इजरायल पर मिसाइल हमले कर रहा है, जिन्हें रोकने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय है।
संघर्ष की लपटें अन्य देशों तक भी पहुंच रही हैं। लेबनान में हुए हमलों में दो लोगों की मौत हुई है। सऊदी अरब ने अपनी राजधानी रियाद की ओर बढ़ रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम किया है। कुवैत के शुवैख पोर्ट और मुबारक अल कबीर पोर्ट को भी नुकसान पहुंचने की खबर है, जिससे यह साफ है कि यह संघर्ष अब क्षेत्रीय स्तर पर फैलता जा रहा है।
कूटनीति और दबाव की राजनीति
इस पूरे घटनाक्रम के बीच डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा है कि युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत सकारात्मक दिशा में चल रही है। अमेरिका ने ईरान को 15 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव भी दिया है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की शर्त शामिल है।
हालांकि ईरान ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और अपनी शर्तें सामने रखी हैं, जिनमें मुआवजे की मांग और इस जलमार्ग पर अपनी संप्रभुता को मान्यता देने की बात कही गई है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, जहां से दुनिया के करीब एक-पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है।
आर्थिक असर और बढ़ती चिंता
इस संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिख रहा है। तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो युद्ध शुरू होने से पहले करीब 70 डॉलर थी। वहीं अमेरिकी शेयर बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
बढ़ती सैन्य गतिविधियां
तनाव के बीच अमेरिका ने भी मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। हजारों मरीन और पैराट्रूपर्स को क्षेत्र में भेजा गया है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि बिना जमीनी सेना उतारे भी अपने लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
इजरायल ने भी दक्षिणी लेबनान में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ाई है, ताकि उत्तरी सीमा को सुरक्षित रखा जा सके और हिज़्बुल्लाह के हमलों को रोका जा सके।
मानवीय संकट गहराया
लगातार बढ़ते इस संघर्ष का सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। ईरान और लेबनान में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग घायल हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर यह स्थिति जारी रही, तो लाखों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ सकता है।
तेजी से बदलते हालात यह संकेत दे रहे हैं कि यह संघर्ष अभी और गहरा सकता है। एक तरफ सैन्य कार्रवाई तेज हो रही है, तो दूसरी ओर कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं। लेकिन फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल है।