कोलकाता: पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक घमासान और तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए सवाल उठाया है कि “लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” जैसी समस्या केवल पश्चिम बंगाल में ही क्यों सामने आ रही है।
यह विवाद उस समय और गहरा गया जब BJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए पश्चिम बंगाल सरकार को निशाने पर लिया। इस पोस्ट में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के बयान का हवाला देते हुए कहा गया कि तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में भी गैर-BJP सरकारें हैं, लेकिन वहां SIR प्रक्रिया को लेकर कोई शिकायत सामने नहीं आई। BJP ने यह भी दावा किया कि अगर केवल एक राज्य से लगातार शिकायतें आ रही हैं, तो समस्या उसी राज्य में है और यह संभावित हार के डर का संकेत हो सकता है।
BJP के इस बयान के तुरंत बाद अभिषेक बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि असली सवाल यह होना चाहिए कि पश्चिम बंगाल में ही “लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” के नाम पर लगभग 1.2 करोड़ लोगों के नाम क्यों चिन्हित किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में ऐसी स्थिति नहीं है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह प्रक्रिया चयनात्मक तरीके से लागू की जा रही है और इसके पीछे राजनीतिक मंशा हो सकती है।
SIR प्रक्रिया पर पहले से उठते रहे हैं सवाल
तृणमूल कांग्रेस लंबे समय से SIR प्रक्रिया का विरोध करती रही है। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए राज्य के आम नागरिकों को परेशान किया जा रहा है और कई मामलों में मतदाताओं के नाम वोटर सूची से हटाने या जांच के दायरे में लाने जैसी शिकायतें सामने आई हैं।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) भी इस मुद्दे को कई बार उठा चुकी हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए देश की सर्वोच्च अदालत में भी इस संबंध में याचिका दायर की है। तृणमूल का कहना है कि “लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी” जैसे तकनीकी आधार पर मतदाताओं को चिन्हित करना उचित नहीं है और इससे आम लोगों में भ्रम और असुरक्षा का माहौल बन रहा है।
चुनावी माहौल में गरमाई सियासत
जैसे-जैसे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 करीब आ रहा है, SIR को लेकर विवाद और राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को अपने चुनावी अभियान का प्रमुख हिस्सा बना रही है और इसे मतदाताओं के अधिकारों पर चोट के रूप में पेश कर रही है।
वहीं BJP इस पूरे विवाद को राजनीतिक रणनीति करार दे रही है। पार्टी का कहना है कि SIR एक नियमित प्रक्रिया है और इसे लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है। BJP नेताओं का दावा है कि चुनाव से पहले माहौल बनाने के लिए इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
प्रशासनिक प्रक्रिया से राजनीतिक मुद्दा बना SIR
SIR, जो मूल रूप से मतदाता सूची को अपडेट करने की एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, अब पूरी तरह से राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुका है। एक ओर जहां चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसे लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का असर सीधे चुनावी माहौल पर पड़ सकता है, क्योंकि यह मुद्दा मतदाता सूची और नागरिक अधिकारों से जुड़ा है।
चुनावी समीकरणों पर कितना असर होगा?
फिलहाल SIR को लेकर स्थिति टकरावपूर्ण बनी हुई है। तृणमूल कांग्रेस इस मामले को राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दा बताते हुए लगातार आवाज उठा रही है, जबकि BJP इसे निराधार आरोप बता रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि यह मामला कानूनी और राजनीतिक स्तर पर किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसका चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।