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कुडनकुलम यूनिट-3 कमीशनिंग के करीब, बड़ा तकनीकी चरण पूरा, भारत में परमाणु ऊर्जा विस्तार को मिली नई गति

भारत-रूस सहयोग से न्यूक्लियर पावर सेक्टर को बढ़ावा, भविष्य में 100 गीगावाट क्षमता के लक्ष्य को लेकर सहयोग और तेज

By डॉ. अभिज्ञात

Apr 28, 2026 19:01 IST

नई दिल्ली: कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना की यूनिट-3 ने ‘स्पिलेज टू ओपन रिएक्टर’ नाम की अहम तकनीकी प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे यह अब चालू होने (कमीशनिंग) के और करीब पहुंच गई है। यह जानकारी न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने दी।

कब और क्यों है यह महत्वपूर्णः एनपीसीआईएल के अनुसार 25 अप्रैल 2026 को इस प्रक्रिया की सफल शुरुआत भारत की ऊर्जा सुरक्षा और टिकाऊ विकास के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

‘स्पिलेज टू ओपन रिएक्टर’ क्या होता हैः इसका मतलब है रिएक्टर की कूलिंग सिस्टम और पाइपलाइनों को पानी से साफ करना, ताकि उसे सुरक्षित तरीके से चलाने की तैयारी पूरी हो सके।

यह प्रक्रिया कैसे काम करती है

इसमें हल्के पानी का इस्तेमाल करके सुरक्षा सिस्टम और मुख्य पाइपलाइन की सफाई और कंडीशनिंग की जाती है। इससे सिस्टम पूरी तरह साफ और तैयार हो जाता है। इसी के साथ मशीनों और उपकरणों की अलग-अलग जांच (फंक्शनल टेस्टिंग) भी शुरू हो जाती है, जिससे यूनिट-3 ऑपरेशन के और करीब पहुंचती है।

किसने किया उद्घाटन और कौन रहा मौजूदः इस उपलब्धि का उद्घाटन एनपीसीआईएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक बी. सी. पाठक ने किया। इस मौके पर एटमस्ट्रॉयएक्सपोर्ट के मिखाइल नोविकोव भी मौजूद थे, जो भारत-रूस सहयोग को दिखाता है।

कुडनकुलम परियोजना का महत्वः तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में स्थित यह परियोजना भारत की स्वच्छ ऊर्जा योजना का अहम हिस्सा है। यूनिट-1 और यूनिट-2 अब तक 121 अरब यूनिट से ज्यादा बिजली बना चुकी हैं और करीब 104 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को रोक चुकी हैं। सभी छह यूनिट पूरी होने पर इसकी कुल क्षमता 6000 मेगावाट होगी।

सुरक्षा और गुणवत्ता पर जोरः एनपीसीआईएल का कहना है कि वह सुरक्षा, गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण के उच्चतम मानकों का पालन कर रहा है, ताकि देश को साफ और आत्मनिर्भर ऊर्जा मिल सके।

भारत-रूस सहयोग की भूमिकाः परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत और रूस की साझेदारी काफी अहम है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मार्च में कहा था कि रूस इस क्षेत्र में भारत का प्रमुख साझेदार है और कुडनकुलम इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा के लक्ष्य में रूस सहयोग करता रहेगा।

शिखर सम्मेलन और समझौतेः दिसंबर में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान भी इस विषय पर चर्चा हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई 23वीं भारत-रूस वार्षिक बैठक के बाद दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई, जिसमें ईंधन, स्थानीय उत्पादन और उपकरण निर्माण शामिल हैं।

परियोजना की प्रगति और भविष्यः पुतिन ने कहा था कि कुडनकुलम भारत का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र बनने की ओर बढ़ रहा है। अभी दो यूनिट काम कर रही हैं और चार का निर्माण जारी है। पूरी क्षमता मिलने पर यह भारत की ऊर्जा जरूरतों में बड़ा योगदान देगा।

आगे की योजनाएंछ भारत और रूस ने भारत में एक और परमाणु ऊर्जा परियोजना लगाने और शांतिपूर्ण परमाणु उपयोग में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है, ताकि 2047 तक 100 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

स्वदेशी तकनीक में भी प्रगतिः भारत अपने दम पर भी परमाणु तकनीक में आगे बढ़ रहा है। तमिलनाडु के कलपक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने पहली बार ‘क्रिटिकलिटी’ हासिल की है, जो उसके संचालन की शुरुआत का अहम चरण है।

प्रधानमंत्री की प्रतिक्रियाः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताया और कहा कि पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बना यह रिएक्टर देश को नई ऊर्जा देगा।

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