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मनीष सिसोदिया का बड़ा फैसला, आबकारी नीति मामले में अदालत में पेश नहीं होंगे

निष्पक्ष न्याय पर आशंका, मनीष सिसोदिया के पत्र से बढ़ा राजनीतिक विवाद।

By शिखा सिंह

Apr 28, 2026 18:36 IST

नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को साफ कर दिया कि वे आबकारी नीति मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश स्वर्णा कांता शर्मा के समक्ष आगे की सुनवाई में भाग नहीं लेंगे।

यह कदम उस फैसले के एक दिन बाद सामने आया है जब आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी इसी अदालत में न तो स्वयं पेश होने और न ही अपने पक्ष में किसी वकील को नियुक्त करने का निर्णय लिया था।

न्यायाधीश स्वर्णा कांता शर्मा को लिखे पत्र में मनीष सिसोदिया ने कहा की मेरी ओर से कोई वकील भी पेश नहीं होगा। आपके बच्चों का भविष्य तुषार मेहता के हाथों में है।

उन्होंने आगे लिखा की मुझे न्याय की उम्मीद नहीं है। अब मेरे पास सत्याग्रह के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

अरविंद केजरीवाल द्वारा लिखे गए पत्र का हवाला देते हुए सिसोदिया ने कहा कि उसमें उठाए गए चिंताजनक मुद्दे उनके मन में भी समान रूप से मौजूद हैं। उन्होंने कहा की मैं उनके रुख से सहमत हूं जो महात्मा गांधी की सत्याग्रह की विचारधारा पर आधारित है।

सोमवार को अरविंद केजरीवाल ने उच्च न्यायालय की न्यायाधीश को पत्र लिखा था जब 20 अप्रैल को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया गया था जिसमें उन्होंने न्यायाधीश से खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग करने की मांग की थी।

पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि वे केजरीवाल द्वारा पहले ही विस्तार से उठाए गए सभी बिंदुओं को दोहराना नहीं चाहते लेकिन यह दर्ज कराना चाहते हैं कि वे चिंताजनक मुद्दे उनके लिए भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

अपने पत्र में उन्होंने लिखा की पहला मुद्दा यह है कि माननीय न्यायाधीश का अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में बार-बार सार्वजनिक रूप से शामिल होना जिसे आम तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा संगठन माना जाता है।

उन्होंने आगे कहा की दूसरा मुद्दा न्यायाधीश के बच्चों की केंद्र सरकार की विभिन्न समितियों में पेशेवर भूमिका से जुड़ा है जिससे यह प्रतीत होता है कि वे उन कानून अधिकारियों के निकट हैं जो इस मामले में मेरे खिलाफ पेश हो रहे हैं।

सिसोदिया ने यह भी सवाल उठाया कि ऐसी परिस्थितियों में पारदर्शिता और आत्म-नियमन की न्यूनतम जिम्मेदारियां क्या थीं और क्या शुरुआत में ही इन तथ्यों को पक्षकारों के सामने रखना आवश्यक नहीं था।

उन्होंने लिखा की मेरी चिंता अदालत के प्रति किसी विरोध से नहीं है बल्कि इस गहरी असहजता से है कि अगर मैं इन परिस्थितियों के बावजूद कार्यवाही में भाग लेता हूं तो यह मेरी अंतरात्मा के खिलाफ होगा जबकि बाहर यह दिखेगा कि सभी संदेह दूर हो चुके हैं।

सिसोदिया ने आगे कहा की मेरे सामने सवाल यह है कि क्या मैं निष्पक्ष न्याय को लेकर गंभीर आशंका के साथ ईमानदारी से इस कार्यवाही में हिस्सा ले सकता हूं? काफी विचार के बाद मेरा जवाब भी केजरीवाल जैसा ही है-मैं ऐसा नहीं कर सकता।

इन सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए मनीष सिसोदिया ने स्पष्ट किया कि वे अब इस मामले में न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही अपने किसी वकील के माध्यम से न्यायाधीश के समक्ष पेश होंगे।

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