नोएडा: गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में न केवल आर्थिक तरक्की का नया रास्ता बनेगा, बल्कि ये टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में भी नायाब नजीर बन रहा है। मेरठ से प्रयागराज तक 594 किमी के इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में लाखों टन कचरे का इस्तेमाल हुआ है। साथ ही 18 लाख पेड़ लगाए गए हैं। एक्सप्रेसवे के साथ ही ऑप्टिकल फाइबर, बिजली और गैस पाइपलाइन भी गुजरेंगी, जिससे यूपी सरकार को हर साल अरबों रुपये का फायदा होने वाला है। एक्सप्रेसवे के मेंटेनेंस का खर्च खुद डिजिटल नेटवर्क ही निकल जाएगा।
डिजिटल हाईवे बनेगा गंगा एक्सप्रेसवे
गंगा एक्सप्रेसवे के साथ 2 मीटर चौड़ा यूटिलिटी कॉरिडोर बनाया गया है। इंटरनेट केबल बिछाने या मरम्मत के लिए एक्सप्रेसवे की सड़क को कभी खोदना नहीं पड़ेगा। इस प्री-बिल्ट कॉरिडोर के भीतर ऑप्टिकल फाइबर (OFC), गैस पाइपलाइन, बिजली के तार या कोई और वायर बिछाई जा सकती है। एक्सप्रेसवे के नीचे ये डार्क फाइबर उत्तर प्रदेश के उन 519 गांवों और पिछड़े जिलों के लिए ब्रॉडबैंड हाईवे का काम करेगा, हर गांव को हाईस्पीड 5G कनेक्टिविटी मिलेगी। इस फाइबर नेटवर्क से एक्सप्रेसवे के किनारे एज डेटा सेंटर (Edge Data Centers) बनाए जा सकते हैं, जो यूपी को बेंगलुरु या हैदराबाद जैसा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर देंगे।
लंबा एनर्जी कॉरिडोर
एक्सप्रेसवे के यूटिलिटी कॉरिडोर में केबल के साथ नेचुरल गैस पाइपलाइन का भी विकल्प है। प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा परियोजना के तहत एक्सप्रेसवे के किनारे बसे गांवों और उद्योगों को सस्ती पीएनजी (PNG) और सीएनजी (CNG) मिल सकेगी।
हादसों पर अलर्ट देंगी स्मार्ट 'आंखें'
स्मार्ट स्ट्रीट लाइटिंग के तहत गंगा एक्सप्रेसवे सेंसर वाली एलईडी लाइटों से लैस है। इसके लिए बिजली और डेटा लाइनें इसी कॉरिडोर में बिछाई गई हैं। हर 2-3 किलोमीटर पर लगे हाई-रेज़ोल्यूशन कैमरे और सेंसर इसी फाइबर से जुड़े हैं। जमीन के नीचे छिपे डिजिटल फाइबर नेटवर्क से एक्सप्रेसवे का स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (STMS) काम करेगा। जैसे ही कोई गाड़ी रुकती है या कोई हादसा होता है तो स्मार्ट अलर्ट सिस्टम से पलक झपकते ही कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजा जाएगा। एंबुलेंस या पेट्रोलिंग टीम कुछ मिनटों में पहुंच जाएगी। रोड एक्सीडेंट में किसी को हेल्प के लिए इमरजेंसी कॉल का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
हादसा होते ही खुदबखुद बजेगा अलार्म
गंगा एक्सप्रेसवे का STMS (Smart Traffic Management System) कंट्रोल रूम किसी वार रूम जैसा 24 घंटे काम करेगा। कंट्रोल रूम में एक विशाल वीडियो वॉल (Video Wall) दिखती है, जिस पर सैकड़ों कैमरों की लाइव फीड एक साथ चलती है। एक्सप्रेसवे के हर 2-3 किलोमीटर पर लगे हाई-डेफिनिशन PTZ कैमरे इस वॉल से जुड़े होते हैं। यहां इंजीनियर 24/7 शिफ्ट में इंजीनियर पूरे 594 किमी के एक्सप्रेसवे की रियल टाइम डिजिटल निगरानी करेंगे। कहीं भी ट्रैफिक धीमा होता है तो रेड अलर्ट होगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत
स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम AI वीडियो रिकॉर्डिंग की पड़ताल भी करेगा। अगर कोई वाहन गलती से या जानबूझकर गलत दिशा में मुड़ता है तो AI तुरंत अलार्म बजा देगा। कंट्रोल रूम के मॉनिटर पर उस गाड़ी का फ्रेम लाल हो जाएगा। अगर कोई गाड़ी एक्सप्रेसवे पर 2 मिनट से ज्यादा ठहरती है तो AI इसे जोखिम मानते हुए निकटतम हाईवे पेट्रोलिंग यूनिट को जीपीएस (GPS) से लोकेशन भेज देगा। बिना किसी दखलंदाजी के AI हर गाड़ी की स्पीड का आकलन करेगा और उल्लंघन करने पर ऑटोमैटिक ऑनलाइन ट्रैफिक चालान भेज देगा।