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गर्मी बढ़ते ही अनियंत्रित हो जाता है माइग्रेन का दर्द? कैसे नियंत्रण में रखेंगे इसे, जानिए यहां

तेज धूप, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), पर्याप्त नींद न होना, लंबे समय तक खाली पेट रहना, अत्यधिक स्क्रीन टाइम जैसी परिस्थितियां अनजाने में ही माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती हैं।

By Moumita Bhattacharya

May 30, 2026 01:45 IST

गर्मियों के दिनों में सिरदर्द की समस्या और भी अधिक पीड़ादायक हो जाती है। खासकर जब तेज गर्मी और लू चल रही हो तब कुछ मिनट के लिए भी बाहर निकलने पर शरीर थका हुआ महसूस करने लगता है। जिन लोगों को माइग्रेन की समस्या होती है, उनके लिए यह मौसम स्थिति को और अधिक जटिल बना देता है।

तेज धूप, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन), पर्याप्त नींद न होना, लंबे समय तक खाली पेट रहना, अत्यधिक स्क्रीन टाइम जैसी परिस्थितियां अनजाने में ही माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती हैं।

इन सभी कारणों से गर्मी के मौसम में माइग्रेन के दौरे अधिक बार और अधिक गंभीर रूप से हो सकते हैं।

क्यों ट्रिगर होता है माइग्रेन?

माइग्रेन आमतौर पर किसी एक कारण से नहीं होता। बल्कि कई छोटे-छोटे कारण एक साथ मिलकर अचानक तेज सिरदर्द का कारण बनते हैं। हालांकि जानकारों का कहना है कि रोजमर्रा की कुछ सामान्य आदतों में बदलाव करके माइग्रेन की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

खासकर गर्मियों में खानपान, पर्याप्त पानी पीना, अच्छी नींद और नियमित व्यायाम माइग्रेन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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लंबे समय तक भूखे रहना, अनियमित नींद, अत्यधिक मानसिक तनाव, रात में देर तक मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल, तेज धूप में रहना, भीषण गर्मी में बाहर घूमना, प्रोसेस्ड या जंक फूड खाना, कम शारीरिक गतिविधि और कुछ लोगों में चॉकलेट या चीज जैसे खाद्य पदार्थ भी माइग्रेन को बढ़ा सकते हैं।

माइग्रेन के दर्द से छुटकारा पाने के लिए नियमित रूप से करें व्यायाम Image - Ei Samay

खाना और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना

माइग्रेन से बचने के लिए नियमित समय पर भोजन करना बेहद जरूरी है। लंबे समय तक खाली पेट रहने से कई लोगों में सिरदर्द या माइग्रेन का दौरा शुरू हो सकता है। इसलिए रोजाना तय समय पर नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना अवश्य खाएं।

इसके साथ ही गर्मियों में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी बहुत महत्वपूर्ण है। जानकारों का कहना है कि एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी न हो और माइग्रेन का खतरा कम रहे।

हालांकि जिन लोगों को किडनी या हृदय संबंधी बीमारी है, उन्हें पानी की मात्रा बढ़ाने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

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क्या खा रहे हैं वह भी है जरूरी

माइग्रेन को नियंत्रित रखने के लिए आहार में प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करना भी महत्वपूर्ण है। जैसे - अंडे, दालें, चना, टोफू, पनीर, मेवे और ग्रीक योगर्ट आदि। इसके साथ ही अत्यधिक तेल-मसालेदार, प्रोसेस्ड और डीप-फ्राइड खाद्य पदार्थों से जितना संभव हो बचना चाहिए। सुबह खाली पेट चाय या कॉफी पीने की आदत भी माइग्रेन को बढ़ा सकती है।

इसकी जगह नारियल पानी पीना बेहतर विकल्प हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि रोजाना थोड़ी मात्रा में कद्दू के बीज खाना भी फायदेमंद हो सकता है। फलों का जूस पीने के बजाय पूरे फल खाना अधिक लाभकारी माना जाता है। साथ ही आहार में पर्याप्त मात्रा में ताजे फल और हरी सब्जियां शामिल करनी चाहिए।

इसके अलावा सॉफ्ट ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक, अत्यधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों और शराब (अल्कोहल) से दूरी बनाकर रखना बेहतर है क्योंकि ये भी कई लोगों में माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं।

व्यायाम और शारीरिक गतिविधियों पर जोर

सिर्फ खानपान ही नहीं बल्कि नियमित व्यायाम भी माइग्रेन को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। पैदल चलना, दौड़ना, तैराकी, डांस या ज़ुम्बा जैसे एरोबिक एक्सरसाइज शरीर और दिमाग दोनों को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। हालांकि कुछ लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

यदि सिरदर्द के साथ धुंधला दिखाई देना, बुखार, गर्दन में अकड़न, संतुलन बिगड़ना, चलने में कठिनाई या सप्ताह में दो से अधिक बार सिरदर्द हो रहा हो तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना जरूरी है।

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