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मार्केट में अब चलेंगे प्लास्टिक के नोट! न फटेंगे और न पानी में गलेंगे, RBI जल्द शुरू कर सकता है पायलट परियोजना

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) बाजार में प्लास्टिक यानी पॉलीमर के नोट लाने की तैयारी कर रही है। सामान्य कागजों से बने नोटों के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत और टिकाऊ होते हैं।

By Moumita Bhattacharya

May 29, 2026 20:19 IST

कोई नोट कोने पर से हल्का फटा तो कोई बीच में से फटा हुआ है। बाजार में चल रहे कागज के 10 और 20 रुपए के अधिकांश नोटों की बदहाल हालत ऐसी है कि उन्हें अगर ठीक से नहीं रखा गया तो वे हल्के हाथों से पकड़ने के बावजूद कभी भी फट सकते हैं।

इन गंदे और फटे-पुराने नोटों को चलाने के लिए ऑटो-टोटो और बस कंडक्टरों के साथ अक्सर यात्रियों की झड़प भी होती है। ऐसी स्थिति में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) बाजार में प्लास्टिक यानी पॉलीमर के नोट लाने की तैयारी कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मार्केट में बढ़ती कैश की मांग, नोटों की स्थिति और नोटों की छपाई की लागत को ध्यान में रखते हुए इसे जारी करने के बारे में विचार कर रही है। हालांकि अभी तक इस बाबत आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की गयी है।

क्या है पॉलीमर नोट?

पॉलीमर नोट किसी सामान्य प्लास्टिक से बने नोट नहीं है। इन्हें विशेष प्रकार की प्लास्टिक जिसे पॉलीमर सब्सट्रेट कहा जाता है, से बनाया जाता है। NDTV की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पॉलीमर नोट सामान्य कागजों से बने नोटों के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत और टिकाऊ होते हैं। दावा किया जाता है कि दुनिया के कई देशों में पिछले कई दशकों से इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

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कितनी टिकाऊ होता है पॉलीमर नोट?

मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जाता है कि कागज से बने परंपरागत नोट जहां हल्की सी नमी में भी खराब हो जाते हैं। बार-बार इस्तेमाल होने पर घिसने लगते हैं और मोड़े जाने पर ये फटने लगते हैं। वहीं पॉलीमर नोट की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि लगातार इस्तेमाल होने या पानी से भीगने के बावजूद आसानी से खराब नहीं होते। ऐसे नोट जल्दी फटते नहीं हैं इसलिए इन्हें बार-बार छपवाने में होने वाला खर्च भी बच जाता है।

जोड़े जा सकते हैं एडवांस फीचर

दावा किया जा रहा है कि पॉलीमर नोट यानी प्लास्टिक के नोटों में एडवांस फीचर भी जोड़े जा सकते हैं जैसे ट्रांसपेरेंट विंडो, माइक्रो प्रिंटिंग या फिर नकल को रोकने के लिए एडवांस एलिमेंट्स इत्यादि। इन सुविधाओं की वजह से नोट को नकल करना आसान नहीं होगा और इससे करेंसी की सुरक्षा भी मजबूत होगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार कनाडा, न्यूजीलैंड, ब्रुनेई, रोमानिया, वियतनाम और पापुआ न्यू गिनी जैसे देशों में पॉलीमर करेंसी की तकनीक ही अपनाई जाती है।

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कब बदले जाएंगे भारतीय नोट?

भारत में प्लास्टिक यानी पॉलीमर नोट को लाने की योजना नई नहीं है। इससे पहले साल 2012 में भी केंद्र सरकार ने इसे देश के कुछ चुनिंदा शहरों में इसका ट्रायल करने की मंजूरी दे दी थी लेकिन किन्हीं कारणवश इसका ट्रायल नहीं किया जा सका था।

मीडिया रिपोर्ट्स में पॉलीमर नोट को शुरु करने की संभावनाओं के बारे में बताया गया है। इन्हें कब से शुरू किया जाएगा, इस बाबत कोई स्पष्ट जानकारी अभी तक नहीं दी गयी है। वहीं इस बारे में कोई भी आधिकारिक घोषणा RBI की ओर से नहीं की गयी है।

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