🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

सरकार का बड़ा कदम: गिग वर्कर्स को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा लाभ, ई-श्रम पोर्टल से होगा डेटा इंटीग्रेशन

2.5 करोड़ तक पहुंच सकता है गिग वर्कफोर्स, युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा स्रोत बनेगा सेक्टर

By प्रियंका महतो

May 29, 2026 14:03 IST

नई दिल्ली : श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। इसके तहत दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य सुविधाएं, मातृत्व सहायता और वृद्धावस्था सुरक्षा जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

साथ ही प्लेटफॉर्म कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने कर्मचारियों का डेटा ई-श्रम पोर्टल से 22 जून की समयसीमा से पहले एकीकृत करें। यह जानकारी शुक्रवार को एक वरिष्ठ श्रम मंत्रालय अधिकारी ने दी।

अशुतोष पेडनेकर ने फिक्की में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स पर आयोजित हितधारक परामर्श को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार सामाजिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों को लागू करने की प्रक्रिया में है और इस क्षेत्र के श्रमिकों के लिए विशेष तंत्र विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इस क्षेत्र में लगभग एक करोड़ श्रमिक कार्यरत हैं और दशक के अंत तक यह संख्या बढ़कर करीब ढाई करोड़ तक पहुंच सकती है। उन्होंने गिग इकॉनमी को देश के लिए “रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र” बताया।

अशुतोष पेडनेकर ने यह भी बताया कि गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड को संचालन के लिए मंजूरी मिल चुकी है, जो इस क्षेत्र में कल्याणकारी योजनाओं पर काम करेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार सामाजिक सुरक्षा निधि (सोशल सिक्योरिटी फंड) को भी लागू कर रही है, जिससे विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का वित्तपोषण किया जाएगा।

लाभों की सूची बताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व है कि श्रमिकों को दुर्घटना कवरेज, वृद्धावस्था सुरक्षा, स्वास्थ्य लाभ, मातृत्व लाभ, नकद सहायता, शिक्षा ऋण सहायता और अंतिम संस्कार खर्च जैसी सुविधाएं दी जाएं।

उन्होंने कहा कि सरकार इन योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए रूपरेखा तैयार कर रही है और फंड प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों से परामर्श भी लिया जा रहा है।

नीति निर्माताओं के सामने एक चुनौती यह भी है कि श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा की मांग और उद्योग की लचीलापन (फ्लेक्सिबिलिटी) की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाए रखा जाए।

अशुतोष पेडनेकर ने कहा कि श्रमिकों के लिए विभिन्न प्रकार की सामाजिक सुरक्षा की मांग लगातार बढ़ रही है, जिन्हें पूरा करना आवश्यक है ताकि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मिल सके।

सरकार की रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा एग्रीगेटर कंपनियों के डेटाबेस को ई-श्रम पोर्टल से जोड़ना है, ताकि श्रमिकों को योजनाओं का सहज लाभ मिल सके।

उन्होंने कहा कि एग्रीगेटर डेटाबेस और ई-श्रम सिस्टम आपस में जुड़े होंगे, जिससे श्रमिकों द्वारा लिए गए लाभों की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव होगी।

इसके अलावा श्रमिक डिजिटल माध्यम से अपने अधिकारों और लाभों की जानकारी मोबाइल ऐप के जरिए प्राप्त कर सकेंगे। अशुतोष पेडनेकर ने भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से तुलना करते हुए कहा कि ई-श्रम पोर्टल लाभ वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी और पोर्टेबल बनाने की क्षमता रखता है।

उन्होंने प्लेटफॉर्म कंपनियों से अपील की कि वे 22 जून की समयसीमा से पहले ई-श्रम पोर्टल से एकीकरण पूरा करें, क्योंकि सरकार बहुत कड़े समय-सीमा के भीतर काम कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि गिग और प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था देश में रोजगार का एक बड़ा स्रोत बन चुकी है विशेषकर युवाओं के लिए और आने वाले वर्षों में यह श्रम बाजार में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी

Articles you may like: