🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

भारत की अर्थव्यवस्था पर कच्चे तेल की मार के बीच सोने में निवेश बढ़ाने की सलाह

विशेषज्ञ ने कहा-'3 ट्रिलियन डॉलर के घरेलू सोने को अर्थव्यवस्था से जोड़ना होगा। एसजीबी योजना दोबारा शुरू करने और ईजीआर को बढ़ावा देने से घट सकता है आयात दबाव।'

By डॉ. अभिज्ञात

May 28, 2026 19:19 IST

मुंबईः पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे माहौल में गोल्ड ईटीएफ और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (ईजीआर) जैसे पेपर गोल्ड निवेश आने वाले वर्षों में निवेशकों के लिए अहम सुरक्षा कवच बन सकते हैं।

एएनआई से बातचीत में एक्सिस डायरेक्ट के वरिष्ठ रिसर्च विश्लेषक (कमोडिटीज) देवैया गगलानी ने कहा कि ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। इसका असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापक आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। जब तक पश्चिम एशिया संकट का स्पष्ट समाधान नहीं निकलता और कच्चे तेल की कीमतें नीचे नहीं आतीं, तब तक भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजारों पर दबाव बना रह सकता है। निवेश पोर्टफोलियो को सुरक्षित और संतुलित रखने के लिए गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड ईजीआर अगले पांच से दस वर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

गगलानी ने बताया कि भारतीय परिवारों के पास अनुमानित 3 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का सोना मौजूद है, जो फिलहाल लॉकरों में निष्क्रिय पड़ा रहता है और किसी तरह का प्रतिफल नहीं देता। यदि सरकार बेहतर प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए इस सोने को वित्तीय प्रणाली में लाने में सफल होती है तो इससे अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा हो सकता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) योजना को दोबारा शुरू करने से रुपये पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। पिछले वर्ष भारत ने 70 अरब डॉलर से अधिक का भौतिक सोना आयात किया था, जो देश के कुल आयात बिल का करीब 10 से 11 प्रतिशत हिस्सा रहा।

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक भी अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम कर धीरे-धीरे सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। इसी तरह खुदरा निवेशकों के बीच भी आभूषणों की बजाय गोल्ड कॉइन और पेपर गोल्ड की ओर रुझान बढ़ रहा है।

गगलानी ने कहा कि गोल्ड ईटीएफ और ईजीआर जैसे वित्तीय उत्पाद सोने को केवल संपत्ति संग्रह का साधन न रखकर एक उत्पादक वित्तीय परिसंपत्ति में बदल सकते हैं। ये विकल्प अलग-अलग बाजारों में कीमतों के अंतर की समस्या को भी कम करते हैं और निवेशकों को एक समान बाजार दर उपलब्ध कराते हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज द्वारा शुरू किया गया इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (ईजीआर) सामान्य गोल्ड ईटीएफ की तुलना में कुछ अतिरिक्त फायदे देता है। गोल्ड ईटीएफ फंड आधारित संरचना पर चलता है, जबकि ईजीआर में निवेशक को सीधे सोने का स्वामित्व मिलता है। ईजीआर में रात 11:30 बजे तक ट्रेडिंग की सुविधा उपलब्ध है और इसमें एक्सपेंस रेशियो का बोझ भी नहीं होता, जिससे यह निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक विकल्प बन सकता है।

Articles you may like: