नई दिल्लीः पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए कोल गैसीफिकेशन पर जोर तेज कर दिया है। कोयला सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आयात पर अत्यधिक निर्भरता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम बन सकती है।
सर्फेस कोल और लिग्नाइट गैसीफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित रोडशो में उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट ने वैश्विक ऊर्जा और कमोडिटी सप्लाई चेन को गहराई से प्रभावित किया है। इससे भारत की आयात निर्भरता से जुड़ी कमजोरियां सामने आई हैं और अब घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है। वित्त वर्ष 2025 में प्राकृतिक गैस, यूरिया, अमोनिया, कोकिंग कोल और मेथेनॉल जैसे उन उत्पादों के आयात पर भारत का कुल खर्च करीब 2.77 लाख करोड़ रुपये रहा, जिन्हें कोल गैसीफिकेशन के जरिए देश में ही तैयार किया जा सकता है। पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद मार्च और अप्रैल में कीमतों में तेजी आने से कई आर्थिक क्षेत्रों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
उन्होंने कहा कि कोल गैसीफिकेशन भारत को दीर्घकालिक समाधान दे सकता है क्योंकि इसके जरिए घरेलू कोयले को प्राकृतिक गैस, अमोनिया, मेथेनॉल, डाइमिथाइल ईथर, हाइड्रोजन और उर्वरक उत्पादन के कच्चे माल में बदला जा सकता है। सवाल यह नहीं है कि कोयले का उपयोग किया जाए या नहीं, बल्कि यह है कि उसका उपयोग कितनी समझदारी से किया जाए।
कोयला सचिव ने बताया कि सरकार की पहली प्रोत्साहन योजना के तहत स्वीकृत परियोजनाएं लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के विदेशी मुद्रा बहिर्वाह को कम करने की क्षमता रखती हैं। यह पहल केवल ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि घरेलू विनिर्माण, औद्योगिक मजबूती और सप्लाई चेन स्थिरता को भी बढ़ावा देगी।
उन्होंने कहा कि भारत इस समय ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां देश अपनी धरती, अपने संसाधनों और अपनी तकनीकी क्षमता के आधार पर औद्योगिक बदलाव और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिख रहा है। भारत के पास दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा कोयला भंडार है और देश की कुल ऊर्जा जरूरतों में कोयले की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत है। ऐसे में आने वाले वर्षों में कोल गैसीफिकेशन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बना रहेगा।
विक्रम देव दत्त ने कहा कि दुनिया में कोल गैसीफिकेशन अब व्यावसायिक रूप से सफल तकनीक बन चुकी है। हालांकि भारत के उच्च राख वाले कोयले के लिए ऐसी तकनीकों की जरूरत होगी, जो यहां की गुणवत्ता और औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप हों। उन्होंने कहा कि भारत केवल विदेशी तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बीएचईएल समेत अन्य संस्थाओं के सहयोग से स्वदेशी गैसीफिकेशन तकनीक विकसित करने पर भी काम कर रहा है। उन्होंने 2021 में शुरू किए गए राष्ट्रीय कोल गैसीफिकेशन मिशन और 37,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना का भी उल्लेख किया। यह समय इस क्षेत्र में बड़े निवेश और तेज विस्तार के लिए सबसे अनुकूल है।