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‘मान्यता दी तो खत्म कर देंगे’: इजरायल मुद्दे पर लश्कर-ए-तैयबा की शाहबाज शरीफ को धमकी

पाकिस्तान में इजरायल को लेकर राजनीतिक और धार्मिक तनाव तेज

इस्लामाबाद : प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने अब सीधे शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को धमकी दी है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इस्लामाबाद किसी भी तरह इजरायल के साथ दोस्ताना संबंध स्थापित करने की कोशिश करता है या उसे आधिकारिक मान्यता देता है, तो इसके “भयानक परिणाम” होंगे।

पश्चिम एशिया में ईरान के साथ तनावपूर्ण हालात के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर पुराने कूटनीतिक समझौते “अब्राहम अकॉर्ड्स” को आगे बढ़ाने की पहल की है। इस समझौते का उद्देश्य अधिक से अधिक देशों को इजरायल को मान्यता देने, उसके साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने और आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार करना है।

इसी मुद्दे पर लश्कर-ए-तैयबा के नेता सैफुल्ला कसूरी ने पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को खुली धमकी दी। उसने कहा कि जो भी नेता इजरायल को मान्यता देगा या उसके साथ संबंध बनाएगा, उसे “मार दिया जाएगा” और “नष्ट कर दिया जाएगा।”

डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव ने पाकिस्तान सरकार को असहज स्थिति में डाल दिया है। कारण यह है कि इजरायल को मान्यता देना पाकिस्तान की दशकों पुरानी आधिकारिक नीति के खिलाफ माना जाता है। पाकिस्तान लंबे समय से फिलिस्तीनी मुद्दे के समर्थन में खड़ा रहा है और इजरायल को मान्यता न देने की नीति अपनाता आया है। पाकिस्तान के भीतर यह धारणा भी मजबूत है कि इजरायल को स्वीकार करना फिलिस्तीन की राजनीतिक लड़ाई और अस्तित्व के प्रश्न को कमजोर कर सकता है।

हालांकि दूसरी ओर यदि इस्लामाबाद अमेरिका के प्रस्ताव के साथ कदम मिलाता है, तो उसे आर्थिक और भू-राजनीतिक लाभ मिलने की संभावना भी दिखाई देती है। पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट, कर्ज और अंतरराष्ट्रीय दबावों से जूझ रहा है। ऐसे में अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ नजदीकी बढ़ाने की संभावनाओं को भी पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। लेकिन इसके साथ ही देश के भीतर व्यापक जनाक्रोश और धार्मिक विरोध का जोखिम भी बना हुआ है।

इस बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने स्पष्ट रूप से कहा कि व्यक्तिगत तौर पर वह नहीं मानते कि पाकिस्तान को इस समझौते में शामिल होना चाहिए। उनके अनुसार यह पाकिस्तान के मूल वैचारिक सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पिछले 78 वर्षों के इतिहास में इस्लामाबाद ने कभी इजरायल को औपचारिक मान्यता नहीं दी है।

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