बैंकॉक : मध्य लाओस की एक जलमग्न गुफा में फंसे सात ग्रामीणों को निकालने के लिए चलाया जा रहा बचाव अभियान मंगलवार को सातवें दिन में प्रवेश कर गया। खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी परिस्थितियों के कारण राहत एवं बचाव दलों को लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अब तक गुफा में फंसे लोगों की स्थिति के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है।
बताया गया है कि ये ग्रामीण 19 मई को शायसोम्बून प्रांत की एक गुफा में गए थे। इसी दौरान तेज बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ ने गुफा का निकास मार्ग बंद कर दिया। इस अभियान में शामिल लाओस और थाईलैंड की बचाव टीमों ने इसकी पुष्टि की है।
गुफा तक पहुंचने में भारी मुश्किलें
स्थानीय प्रशासन के साथ काम कर रहे लाओ संगठन ‘रेस्क्यू वॉलंटियर फॉर पीपल’ ने अपने फेसबुक पोस्ट में बताया कि मंगलवार की योजना के तहत गुफा के ऊपर मौजूद वायु-छिद्रों की जांच की जा रही है ताकि भीतर फंसे लोगों तक पहुंचने का कोई वैकल्पिक रास्ता खोजा जा सके।
पड़ोसी देश थाईलैंड से भी बचावकर्मी सप्ताहांत में घटनास्थल पर पहुंचे और अभियान में सहयोग कर रहे हैं। बचाव दल के अनुसार, गोताखोर अब तक करीब 100 मीटर तक संकरी और पानी से भरी गुफा के भीतर पहुंच सके हैं। उनका अनुमान है कि ग्रामीण वर्तमान पहुंच बिंदु से लगभग 30 मीटर आगे फंसे हो सकते हैं। राहतकर्मी पानी बाहर निकालने के लिए लगातार पंपिंग कर रहे हैं ताकि खोज अभियान को आगे बढ़ाया जा सके।
दुर्गम पहाड़ी इलाका और लगातार बारिश बनी चुनौती
यह गुफा शायसोम्बून प्रांत के लोंगचेंग जिले के दूरदराज क्षेत्र में स्थित है, जो राजधानी वियनतियाने से लगभग 120 किलोमीटर उत्तर में है। घटनास्थल पर मौजूद बचावकर्मियों ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि पहाड़ी रास्ते और लगातार हो रही बारिश अभियान को बेहद कठिन बना रहे हैं।
थाई बचाव दल द्वारा साझा किए गए वीडियो में दिखाया गया कि गुफा के प्रवेश द्वार तक पहुंचने के लिए करीब चार किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है। गुफा का मुहाना भी बेहद संकरा और पथरीला है, जहां से एक समय में मुश्किल से एक व्यक्ति ही गुजर सकता है।
गुफा के भीतर की स्थिति भी काफी खतरनाक बताई जा रही है। बचावकर्मियों को कीचड़ भरे रास्तों, जलमग्न हिस्सों और बेहद संकरी सुरंगों से होकर गुजरना पड़ रहा है, जहां कई जगह उन्हें रेंगते हुए आगे बढ़ना पड़ा।
सोने के भंडार तलाश में गुफा में जाने की आशंका
अधिकारियों की ओर से अब तक यह आधिकारिक रूप से नहीं बताया गया है कि ग्रामीण गुफा में क्यों गए थे। हालांकि अभियान में शामिल बचावकर्मियों का कहना है कि वे सोने के भंडार की तलाश में भीतर गए थे। लाओस के बचाव दल से जुड़े बौनखाम लुआंगलाथ ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि स्थानीय लोग अक्सर सोने की खोज के लिए इस गुफा में जाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से कई बार लोगों को वहां जाने से मना किया था, लेकिन इसके बावजूद लोग गुफा में प्रवेश करते रहे।
लाओस की अर्थव्यवस्था में खनन क्षेत्र की बड़ी भूमिका
दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे कम प्रति व्यक्ति आय वाले देशों में शामिल लाओस में औसत वार्षिक प्रति व्यक्ति आय करीब 2,000 से 2,500 डॉलर के बीच है। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में यह आय और भी कम मानी जाती है। हालांकि लाओस को बड़े स्वर्ण उत्पादक देशों में शामिल नहीं किया जाता लेकिन उसकी विकासशील अर्थव्यवस्था में खनन उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से थाईलैंड और चीन से आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का योगदान है। तांबा लाओस का प्रमुख निर्यात उत्पाद है, जबकि आधुनिक तकनीकों में उपयोग होने वाले दुर्लभ खनिज तत्वों की खुदाई भी हाल के वर्षों में बढ़ी है।
सरकार ने मीडिया से दूरी बनाए रखी
लाओस के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि उसके पास मीडिया के साथ साझा करने के लिए कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। दक्षिण-पूर्व एशिया का यह देश एकदलीय साम्यवादी व्यवस्था के तहत संचालित होता है, जहां सरकार सूचनाओं के प्रसार पर कड़ा नियंत्रण रखती है।
थाईलैंड की 2018 की गुफा से जुड़ी घटना की यादें ताजा
इस घटना ने थाईलैंड में भी व्यापक चर्चा पैदा कर दी है क्योंकि इसकी तुलना वर्ष 2018 में उत्तरी थाईलैंड में हुए चर्चित गुफा बचाव अभियान से की जा रही है। उस घटना में 12 किशोर फुटबॉल खिलाड़ी और उनके कोच दो सप्ताह से अधिक समय तक गुफा में फंसे रहे थे और बाद में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय अभियान के जरिए उन्हें सुरक्षित निकाला गया था। उस अभियान के दौरान थाई नौसेना के एक पूर्व सील गोताखोर की मौत भी हो गई थी।
गुफा में फंसे लोगों के सामने स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे
विशेषज्ञों के अनुसार गुफा में लंबे समय तक फंसे रहने पर सबसे बड़ा खतरा अत्यधिक ठंड का होता है, जिससे शरीर में हाइपोथर्मिया की स्थिति तेजी से विकसित हो सकती है। मानव शरीर कई सप्ताह तक भोजन के बिना जीवित रह सकता है लेकिन निर्जलीकरण से बचने के लिए स्वच्छ पानी जरूरी होता है। दूषित पानी दस्त जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है, जिससे शरीर में पानी की कमी और तेजी से बढ़ सकती है। गुफा के भीतर ऑक्सीजन का स्तर घटने पर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाली बीमारी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर फेफड़ों और अन्य अंगों को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ने से थकान और अंततः बेहोशी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि लगातार अंधेरे में रहने से समय का अनुमान लगाने की क्षमता और शरीर की जैविक घड़ी प्रभावित होती है। लंबे समय बाद रोशनी में आने पर आंखों को सामान्य स्थिति में लौटने में भी कठिनाई होती है।