पूर्णिया(बिहार): कीमती वस्तुओं की चोरी तो आम बात है, लेकिन महंगाई के इस दौर में अब बकरी-बकरे की चोरी भी बढ़ने लगी है, क्योंकि इनकी कीमतें भी आसमान छू रही हैं। खासकर पर्व-त्योहारों से पहले, जिनमें बलि की परंपरा होती है, बकरों के दाम अचानक बढ़ जाते हैं। लेकिन पूर्णिया जिले के बायसी थाना क्षेत्र के बखरिया यादव टोला में जिस तरीके से बकरी चोरी की घटना को अंजाम दिया गया, वह चौंकाने वाला है।
दरअसल, सोमवार को बकरी चोरों ने दिनदहाड़े लाखों रुपये मूल्य की लक्जरी कार का इस्तेमाल कर चोरी की घटना को अंजाम दिया। पहले बकरी चोरी की घटनाएं आमतौर पर बाइक या साइकिल के जरिए होती थी। लेकिन अब चोरी का तरीका बदल गया है, जो लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। वहीं, पशुपालकों की चिंता भी बढ़ गई है। इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
बखरिया यादव टोला में हुई यह घटना दोपहर के समय हुई, जब गांव में सन्नाटा छाया रहता है। अधिकांश लोग रोजगार के सिलसिले में बाहर रहते हैं या खेतों में काम कर रहे होते हैं। सीसीटीवी फुटेज में सड़क सुनसान दिखाई देती है, हालांकि कुछ सेकेंड पहले दो महिलाएं खेत से चारा लेकर लौटती नजर आती हैं। इसके अलावा, रात के समय भी ऐसी घटनाएं आम होती हैं, क्योंकि बकरी-बकरे को अक्सर घर के बाहर या सड़क किनारे ही बांधा जाता है।
लक्जरी कार से 9 बकरी-बकरे बरामद
चोरी में लक्जरी कारों का इस्तेमाल इसलिए किया जा रहा है, ताकि आम लोगों को शक न हो सके। इन गाड़ियों के शीशों पर काली फिल्म लगी होती है, जिससे अंदर क्या चल रहा है, यह साफ नहीं दिखाई देता। हाल के दिनों में लक्जरी गाड़ियों से बकरी चोरी की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है, हालांकि कई मामलों की पुलिस में रिपोर्ट भी दर्ज नहीं हो पाती है। 23 मई को पड़ोसी जिले अररिया के नरपतगंज में वाहन चेकिंग के दौरान एक लक्जरी कार से 9 बकरी-बकरे बरामद किए गए थे। पुलिस को देखते ही चोर मौके से फरार हो गए। इस घटना और पूर्णिया की घटना में समानता यह है कि दोनों में हुंडई वेन्यू एसएक्स जैसी महंगी गाड़ी का इस्तेमाल हुआ, जिसकी कीमत करीब 12-13 लाख रुपये बताई जाती है।
ग्रामीण इलाकों में कम लागत में बकरी पालन एक आसान और लाभकारी काम है। बकरी को पालने में ज्यादा खर्च नहीं आता और इसे कहीं भी चराया जा सकता है। आर्थिक रूप से देखें तो 5-6 महीने में एक बकरी आसानी से करीब 5 हजार रुपये में बिक जाती है। जरूरत पड़ने पर इन्हें तुरंत बेचकर नकद पैसा भी मिल जाता है। यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी को गरीबों का ‘एटीएम' कहा जाता है, जो संकट के समय सहारा बनती है।