पटना : बिहार सरकार ने बुधवार को दावा किया कि राज्य के 93 प्रतिशत से अधिक परिवारों को पाइपलाइन के माध्यम से नल का जल उपलब्ध कराया जा चुका है। सरकार के अनुसार, वर्ष 2016 में जहां केवल 2.66 लाख परिवारों तक नल जल योजना की पहुंच थी, वहीं 2026 तक यह संख्या बढ़कर 1.87 करोड़ परिवारों तक पहुंच गई है।
पटना में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के मंत्री संजय कुमार सिंह ने कहा कि अगले तीन महीनों के भीतर सभी छूटे हुए टोले और बस्तियों, विशेष रूप से महादलित बस्तियों में भी नल जल कनेक्शन सुनिश्चित कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि सरकार ने कुल 2.02 करोड़ परिवारों तक जलापूर्ति पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
संजय कुमार सिंह ने कहा कि राज्य सरकार ने भीषण गर्मी और लू की स्थिति से निपटने के लिए भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 475 पानी टैंकों और कई वाटर एटीएम की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2025-26 के दौरान 1.13 लाख चापाकलों की मरम्मत की गई है।
हालांकि लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के प्रधान सचिव राजेश कुमार ने स्वीकार किया कि राज्य में अभी भी 86 हजार चापाकल खराब पड़े हैं। उन्होंने कहा कि विभाग युद्धस्तर पर उनकी मरम्मत का कार्य कर रहा है।
संजय कुमार सिंह ने बताया कि सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में 100 नए वाटर एटीएम स्थापित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि श्रावणी मेला जैसे बड़े आयोजनों के दौरान भी ये वाटर एटीएम संचालित रहेंगे।
मंत्री ने कहा कि विभाग ने पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच के लिए राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला मान्यता बोर्ड से मान्यता प्राप्त एक राज्य स्तरीय प्रयोगशाला, 38 जिला स्तरीय प्रयोगशालाएं और 75 अनुमंडल स्तरीय प्रयोगशालाएं स्थापित की हैं।इसके अलावा प्रत्येक पंचायत स्तर पर मल्टी-पैरामीटर फील्ड टेस्टिंग किट और एच2एस वायल भी उपलब्ध कराए गए हैं।
संजय कुमार सिंह ने कहा कि इनसे प्राप्त आंकड़ों को केंद्र सरकार के जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली पोर्टल पर दर्ज किया जाता है, जिससे जल गुणवत्ता की लगातार निगरानी और रिपोर्टिंग संभव हो पाती है।
उन्होंने बताया कि विभाग पेयजल ऐप के माध्यम से इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित वास्तविक समय निगरानी प्रणाली का भी उपयोग कर रहा है, जिससे जल उपलब्धता की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
मंत्री ने कहा कि पेयजल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए केंद्रीकृत शिकायत निवारण प्रकोष्ठ पूरी तरह सक्रिय है। उन्होंने बताया कि अगस्त 2025 से मई 2026 के बीच केंद्रीकृत शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में 1.54 लाख से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से लगभग 1.46 लाख शिकायतों का समाधान कर दिया गया है।