कोलकाताः पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष और संगठनात्मक संकट लगातार गहराता दिखाई दे रहा है। अब बारासत लोकसभा सीट से चार बार की सांसद काकोली घोष दस्तीदार के कदम ने पार्टी के अंदर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी को पत्र लिखकर सभी संगठनात्मक पदों और जिम्मेदारियों से मुक्त करने का अनुरोध किया है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि वे पार्टी नहीं छोड़ रही हैं, लेकिन संगठनात्मक जिम्मेदारियों से खुद को अलग करना चाहती हैं।
अपने पत्र में उन्होंने “बहुत दुख और चिंता” के साथ लिखा कि वे ऑल इंडिया तृणमूल महिला कांग्रेस की चेयरपर्सन समेत पार्टी की विभिन्न समितियों और संगठनात्मक पदों से हटना चाहती हैं।
राजनीतिक हलकों में इस पत्र को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह ऐसे समय आया है जब टीएमसी के भीतर लगातार इस्तीफों, असंतोष और नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
चुनावी हार, रणनीति और संगठन पर उठाए सवाल
काकोली घोष दस्तीदार ने अपने पत्र में बारासत संसदीय क्षेत्र में पार्टी के खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी भी ली है। उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजों को देखते हुए वे बारासत संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रही हैं।
2026 विधानसभा चुनाव में बारासत लोकसभा क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से टीएमसी केवल दो सीटें जीत सकी, जबकि भाजपा ने पांच सीटों पर कब्जा कर लिया। पूरे राज्य में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर सरकार बनाई, जबकि टीएमसी लगभग 80 सीटों तक सीमित रह गई।
अपने पत्र में काकोली घोष दस्तीदार ने बिना नाम लिए I-PAC जैसे बाहरी रणनीतिक समूहों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने टिप्पणी की कि “मशरूम की तरह उगने वाले संगठन” पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
इसके अलावा उन्होंने भ्रष्टाचार, पारदर्शिता की कमी और पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी जैसे मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की। उनका मानना है कि जमीनी स्तर पर लंबे समय से काम कर रहे कार्यकर्ताओं को पर्याप्त महत्व नहीं मिलने से संगठन कमजोर हुआ है।
TMC में बढ़ती बेचैनी और नेतृत्व पर नजर
काकोली घोष दस्तीदार को टीएमसी की वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में गिना जाता है। वे लंबे समय से ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी रही हैं और पार्टी के महिला संगठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी हैं।
इससे पहले उन्हें लोकसभा में टीएमसी के चीफ व्हिप पद से हटाया जा चुका है। उनकी जगह कल्याण बनर्जी को जिम्मेदारी दी गई थी। अब बाकी संगठनात्मक पदों से भी दूरी बनाने की उनकी इच्छा को पार्टी के भीतर गहरी बेचैनी का संकेत माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम टीएमसी के अंदर पुरानी नेतृत्व शैली और नई चुनावी रणनीति के बीच बढ़ते मतभेद को उजागर करता है।
हालांकि काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी में बने रहने का भरोसा दिलाया है, लेकिन उनके पत्र और टिप्पणियों ने संगठन के भीतर नई चर्चा शुरू कर दी है। अब राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व, खासकर ममता बनर्जी, इस पूरे मामले पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं।