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टीएमसी में इस्तीफों की बाढ़ पर दिलीप घोष का तंज, क्या जवाबदेही खत्म हो जाएगी?

पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलाव के बाद राजनीतिक हलचल तेज, अवैध काम और भ्रष्टाचार पर कड़ी कार्रवाई के संकेत।

By श्वेता सिंह

May 27, 2026 13:31 IST

श्यामनगरः पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के जनप्रतिनिधियों के बीच इस्तीफों की बढ़ती लहर ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। इसी बीच राज्य सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए साफ संदेश दिया है कि केवल पद छोड़ देने से किसी भी तरह की जवाबदेही या कानूनी कार्रवाई खत्म नहीं होगी।

“इस्तीफा देकर बच नहीं सकते”, दिलीप घोष का सख्त संदेश

कल्याणी में मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक बैठक के बाद श्यामनगर में कार्यकर्ताओं से मुलाकात के दौरान दिलीप घोष ने मीडिया से बातचीत में तीखे शब्दों में प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि जो लोग पिछले कई वर्षों से कथित तौर पर भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों में शामिल रहे हैं, वे अब इस्तीफा देकर बचने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि कानून से बचना संभव नहीं है। उनके अनुसार सभी मामलों की विस्तृत जांच होगी और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

राजनीतिक बदलाव के बाद बड़े पैमाने पर इस्तीफे

2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी बहुमत मिला, जिसमें 294 में से लगभग 207-208 सीटें हासिल हुईं, जबकि टीएमसी केवल करीब 80 सीटों तक सिमट गई।

इस राजनीतिक बदलाव के बाद राज्य में कई पंचायत प्रधान, नगर निकाय प्रतिनिधि और काउंसिलर या तो इस्तीफा दे रहे हैं या भाजपा से संपर्क कर रहे हैं। इसे लेकर सत्ताधारी खेमे में असंतोष और अस्थिरता की स्थिति देखी जा रही है।

अवैध घुसपैठ पर सरकार का सख्त रुख

नई भाजपा सरकार ने अवैध घुसपैठियों, खासकर बांग्लादेशी और रोहिंग्या समुदाय से जुड़े मामलों पर कड़ा कदम उठाने की घोषणा की है।

गृह विभाग ने 23 मई 2026 को सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए “होल्डिंग सेंटर” स्थापित करने का आदेश दिया है, जहां ऐसे लोगों को रखकर बाद में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सहयोग से वापस भेजने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

कई जिलों में ये केंद्र पहले ही सक्रिय किए जा चुके हैं और कुछ लोगों को वहां स्थानांतरित भी किया गया है।

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“कानून सभी को जवाबदेह बनाएगा”, मंत्री का बयान

दिलीप घोष ने पूर्व टीएमसी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं हुई हैं।

उन्होंने कहा कि पंचायत से लेकर नगर निकाय तक कई स्तरों पर भ्रष्टाचार के मामले सामने आएंगे और जांच के बाद कार्रवाई तय है। उनके अनुसार, अब किसी को भी राजनीतिक संरक्षण के आधार पर राहत नहीं मिलेगी।

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राजनीतिक तनाव और जांच का बढ़ता दायरा

राज्य में चल रही राजनीतिक हलचल के बीच सरकार का दावा है कि उनकी प्राथमिकता पारदर्शी शासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन है।

वहीं विपक्षी खेमे में बढ़ते इस्तीफों और आरोपों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में जांच और कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।

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