नई दिल्ली : नरेंद्र मोदी द्वारा 10 मई को देश के नागरिकों से ऊर्जा खर्च कम करने की अपील के बाद, कैश लॉजिस्टिक्स उद्योग से जुड़ी संस्था करेंसी साइकिल एसोसिएशन (सीसीए) ने भी खर्च कम करने के लिए एक नया प्रस्ताव पेश किया है।
सीसीए के अनुसार देश के सभी एटीएम से एक समान गति से नकदी की निकासी नहीं होती। कुछ एटीएम में नियमित रूप से कैश भरने की आवश्यकता होती है, जबकि कई एटीएम में यह आवश्यकता कम होती है या नहीं होती। ऐसे में एटीएम के विड्रॉल पैटर्न और ट्रांजैक्शन की गति का विश्लेषण करके नकदी रिफिलिंग की व्यवस्था तय की जानी चाहिए।
संस्था ने सुझाव दिया है कि जिन एटीएम में हर दिन नकदी भरने की जरूरत नहीं होती वहां एक दिन के अंतराल पर या मांग के अनुसार नकदी रिफिलिंग की व्यवस्था की जा सकती है। सीसीए का दावा है कि इससे कैश लॉजिस्टिक्स कंपनियों की लागत कम होगी और अनावश्यक ऊर्जा खर्च में भी बचत होगी।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सीसीए ने इस विषय में भारतीय बैंक संघ को भी पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि बढ़ती ईधन लागत के कारण उनके परिचालन खर्च में वृद्धि हो रही है। साथ ही न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी के कारण आने वाले समय में लागत 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
उल्लेखनीय है कि एटीएम में नकदी रिफिलिंग करने वाली कंपनियों के कुल खर्च का एक बड़ा हिस्सा ईधन पर निर्भर करता है। पिछले 11 दिनों में चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि हुई है और आगे भी बढ़ोतरी की आशंका के बीच रिफिलिंग कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है। इसी कारण एटीएम कैश रिफिलिंग से जुड़ी कंपनियों के संगठन ने यह नया प्रस्ताव पेश किया है ताकि ईधन खर्च को कम किया जा सके।