नई दिल्लीः केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में सुरक्षा सेंध लगने के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर जिस URL को लेकर दावा किया जा रहा है, वह वास्तविक मूल्यांकन पोर्टल नहीं बल्कि केवल टेस्टिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली साइट है।
सोशल मीडिया पोस्ट के बाद उठा विवाद
मामला तब चर्चा में आया जब एक सोशल मीडिया यूजर ने दावा किया कि उसने 26 फरवरी 2026 को CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से जुड़े पोर्टल को एक्सेस कर लिया था। इसी दावे के आधार पर कुछ खबरें भी सामने आईं, जिनमें सिस्टम की सुरक्षा पर सवाल उठाए गए।
CBSE ने दी सफाई
CBSE ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि जिस URL का जिक्र किया जा रहा है, वह केवल आंतरिक परीक्षण और समीक्षा के लिए बनाई गई टेस्टिंग साइट है। उस पोर्टल पर छात्रों के अंक, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन डेटा या कोई संवेदनशील जानकारी मौजूद नहीं थी।
बोर्ड ने साफ कहा कि वास्तविक मूल्यांकन कार्य के लिए इस्तेमाल किया गया पोर्टल पूरी तरह सुरक्षित है और उसमें किसी तरह की सुरक्षा खामी सामने नहीं आई है।
‘सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मजबूत’
CBSE ने अपने बयान में कहा कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
बोर्ड ने भरोसा दिलाया कि वास्तविक मूल्यांकन प्लेटफॉर्म पर मजबूत सुरक्षा उपाय लागू हैं और छात्रों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
URL में गलती की भी दी जानकारी
CBSE ने यह भी बताया कि अपने पहले पोस्ट में गलती से URL में अतिरिक्त ‘s’ जोड़ दिया गया था। बाद में बोर्ड ने सही URL के साथ संशोधित पोस्ट जारी किया।
लाखों छात्रों ने मांगी उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी
बोर्ड ने परीक्षा परिणाम के बाद की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी साझा की। CBSE के अनुसार—
4,04,319 छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया
कुल 11,31,961 उत्तर पुस्तिकाओं की मांग की गई
इनमें से 8,98,214 उत्तर पुस्तिकाएं डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराई जा चुकी हैं
IIT विशेषज्ञों की मदद भी ले रहा CBSE
इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने IIT मद्रास और IIT कानपुर के प्रोफेसरों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को CBSE की सहायता के लिए भेजने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह तकनीकी रूप से सुरक्षित और बिना किसी बाधा के संचालित करना है।