पुणे : महाराष्ट्र की 16 वर्षीय अनिका दुबे ने चीन में आयोजित एशियाई जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। मंगलवार को संपन्न हुई इस प्रतियोगिता में अनिका पूरे एशिया के शीर्ष जूनियर खिलाड़ियों के बीच उपविजेता रहीं।
पुणे की “गोल्डन गर्ल” के नाम से पहचानी जाने वाली अनिका दुबे ने महज 14 साल की उम्र में ही एशियाई स्तर पर पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दे दिया था। अब दो वर्षों बाद उन्होंने खुद को एशिया की शीर्ष जूनियर खिलाड़ियों में मजबूती से स्थापित कर लिया है।
अनिका की यह सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे खिलाड़ियों के विकास से जुड़े एक बड़े अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है। यह अभियान स्पोर्ट्सस्किल द्वारा संचालित चांस2स्पोर्ट्स फाउंडेशन प्रोग्राम के माध्यम से आगे बढ़ाया जा रहा है।
इस चैंपियनशिप में इसी कार्यक्रम से जुड़ी दो अन्य खिलाड़ी वसुंधरा नांगरे और आकांक्षा गुप्ता ने भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। इस तरह एक ही विकास प्रणाली से तैयार हुई तीन खिलाड़ियों ने एशिया के सबसे प्रतिष्ठित जूनियर स्क्वैश टूर्नामेंट में हिस्सा लिया।
इस खेल विकास प्रणाली को स्पोर्ट्सस्किल के सह-संस्थापक अभिनव सिन्हा और चेतन देसाई ने तैयार किया है। इसमें उच्च स्तरीय खेल अनुभव को दीर्घकालिक खिलाड़ी विकास सिद्धांतों के साथ जोड़ा गया है। कार्यक्रम में रिकवरी, फिटनेस, मूवमेंट क्वालिटी, चोट से बचाव और मानसिक मजबूती जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
स्पोर्ट्सस्किल के सह-संस्थापक और कई बार के राष्ट्रीय चैंपियन अभिनव सिन्हा ने कहा, “जब आप लंबे समय तक चैंपियन खिलाड़ियों के साथ काम करते हैं, तब समझ में आता है कि कोर्ट पर बिताए गए घंटों के साथ-साथ रिकवरी, मूवमेंट क्वालिटी, फिटनेस और अनुशासन भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। अनिका इसका शानदार उदाहरण हैं। उनका रजत पदक केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि यह दर्शाता है कि व्यवस्थित और समग्र विकास से किस तरह के परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।”
स्पोर्ट्सस्किल के सह-संस्थापक और अनुभवी टेनिस चैंपियन चेतन देसाई ने कहा, “मैं लगभग 55 वर्षों से खेल जगत से जुड़ा हूं और पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि इस पीढ़ी के खिलाड़ियों में कुछ बेहद खास दिखाई देता है। अनिका का रजत पदक वर्षों की शांत, लगातार और समर्पित मेहनत का परिणाम है। यह मेहनत कोर्ट पर, कोर्ट के बाहर और मानसिक स्तर पर लगातार की गई है। असली चैंपियन इसी तरह तैयार होते हैं।”
इस उपलब्धि में ‘कांगा किड्स प्रोग्राम’ की भूमिका को भी विशेष रूप से सराहा गया। इस कार्यक्रम की स्थापना दिवंगत नोशिर कांगा की स्मृति में उनकी पत्नी डेबोरा कांगा ने की थी। पिछले तीन से चार वर्षों के दौरान इस कार्यक्रम ने इन तीनों खिलाड़ियों को उनके शुरुआती विकास काल में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
नोशिर कांगा स्क्वैश के बड़े प्रशंसक थे और नियमित रूप से सीसीआई में खेला करते थे। वहां उनके साथ नवल पंडोले भी खेलते थे, जो आज चांस2स्पोर्ट्स पहल के प्रमुख मार्गदर्शकों और मजबूत समर्थकों में शामिल हैं। उनके सहयोग से इन खिलाड़ियों को बेहतर कोचिंग, टूर्नामेंट अनुभव और दीर्घकालिक विकास के अवसर मिल सके।