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मोबाइल और सोशल मीडिया छोड़ भजन में रम रहे इंजीनियरिंग छात्र

गुजरात के इंजीनियरिंग कॉलेज में भजनों और संगीत के जरिए छात्र तलाश रहे मानसिक सुकून, कैंपस में तेजी से लोकप्रिय हो रही नई पहल।

By श्वेता सिंह

May 26, 2026 20:04 IST

अहमदाबादः गुजरात के अहमदाबाद स्थित विश्वकर्मा गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज (वीजीईसी) में इंजीनियरिंग के छात्र अब पढ़ाई, कोडिंग और प्लेसमेंट के दबाव से राहत पाने के लिए एक अलग रास्ता अपना रहे हैं। यहां छात्रों ने ‘भजन क्लबिंग’ नाम से एक अनोखी पहल शुरू की है, जिसमें पारंपरिक भजनों को आधुनिक संगीत वाद्ययंत्रों के साथ प्रस्तुत किया जाता है। यह पहल अब छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

तनाव और अकेलेपन से जूझ रहे छात्रों के लिए नई शुरुआत

कॉलेज के छात्रों का कहना है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान लगातार असाइनमेंट, कोडिंग प्रोजेक्ट और प्लेसमेंट की तैयारी के कारण मानसिक दबाव बढ़ जाता है। ऐसे माहौल में ‘भजन क्लबिंग’ उन्हें तनाव से बाहर निकालने और मानसिक शांति देने का काम कर रही है।

इस पहल से जुड़े छात्र निहार जगतिया ने बताया कि युवाओं में बढ़ते तनाव और भावनात्मक दूरी को देखते हुए इस कार्यक्रम की शुरुआत की गई। उनके अनुसार, आजकल युवा अपनी भावनाएं खुलकर साझा नहीं करते और आपसी जुड़ाव भी कम होता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ छात्रों ने ऐसा मंच तैयार करने की योजना बनाई, जहां लोग एक साथ बैठकर संगीत और भजनों के जरिए सकारात्मक माहौल का अनुभव कर सकें।

‘मन की बात’ से मिली प्रेरणा

निहार जगतिया ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में ‘भजन क्लबिंग’ का उल्लेख किया था। इसके बाद छात्रों ने इस विचार को कॉलेज परिसर में लागू करने का फैसला किया।

शुरुआत में कुछ छात्रों ने इसमें हिस्सा लिया, लेकिन धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई और बड़ी संख्या में छात्र इससे जुड़ने लगे। अब यह गतिविधि कॉलेज कैंपस की पहचान बनती जा रही है।

संगीत से घटा तनाव, बढ़ी एकाग्रता

कॉलेज की प्रोफेसर अमी यू. छाया का कहना है कि भजन सत्रों में नियमित भागीदारी से छात्रों की मानसिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। उनके अनुसार, छात्रों में तनाव और चिंता के स्तर में कमी आई है और वे पहले की तुलना में अधिक शांत और केंद्रित नजर आ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि संगीत और लय पर आधारित भजनों का अभ्यास याददाश्त और एकाग्रता बढ़ाने में भी मदद करता है। इसके अलावा, गुजराती भाषा में भजन गाने से छात्रों की भाषा पर पकड़ और शब्दावली भी मजबूत हुई है।

मोबाइल से दूरी, आपसी जुड़ाव में बढ़ोतरी

कॉलेज प्रशासन का मानना है कि इस पहल ने छात्रों को डिजिटल दुनिया से कुछ समय के लिए दूर रहने का अवसर दिया है। लगातार मोबाइल और सोशल मीडिया पर समय बिताने वाले छात्र अब समूह में बैठकर संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं।

भजन सत्रों के दौरान छात्र एक-दूसरे के साथ समय बिताते हैं, बातचीत करते हैं और टीम भावना भी विकसित होती है। इससे कैंपस में सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ है।

तकनीकी शिक्षा के साथ सांस्कृतिक संतुलन

वीजीईसी के प्राचार्य विनय पुराणी ने कहा कि यह पहल इंडस्ट्री 5.0 की मानव-केंद्रित सोच के अनुरूप है। उनके अनुसार, तकनीकी शिक्षा के साथ मानसिक स्वास्थ्य, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक जुड़ाव को भी महत्व देना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि ‘भजन क्लबिंग’ छात्रों के लिए तनाव कम करने का प्रभावी माध्यम बन रहा है और इसे छात्रों की ओर से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है।

कैंपस गतिविधि से बन रहा नया ट्रेंड

कॉलेज में इस वर्ष कई ‘भजन क्लबिंग’ कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। जो पहल शुरुआत में एक साधारण कैंपस एक्टिविटी थी, वह अब छात्रों के बीच नए ट्रेंड के रूप में उभर रही है।

छात्रों का मानना है कि यह कार्यक्रम उन्हें पढ़ाई और करियर की दौड़ के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर रहा है। साथ ही, यह उन्हें भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से भी जोड़ रहा है।

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