नई दिल्लीः नई दिल्ली में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने का फैसला लिया है। नया नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होगा। बोर्ड के अनुसार, इन तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी होगा।
यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप किया गया है। CBSE ने 15 मई को जारी सर्कुलर में कहा कि छात्रों को अब भाषा अध्ययन के नए प्रारूप का पालन करना होगा।
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यदि कोई छात्र विदेशी भाषा चुनना चाहता है, तो वह केवल तीसरी भाषा के रूप में दो भारतीय भाषाएं पढ़ने के बाद ही ऐसा कर सकेगा। विदेशी भाषा को अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में भी लिया जा सकता है। एएनआई ने सोशल मीडिया पर ट्वीट भी किया है।
The Central Board of Secondary Education (CBSE) has made the study of three languages compulsory for students from Class IX beginning July 1, 2026, while clarifying that there will be no Board examination for the third language (R3) in Class X.
— ANI (@ANI) May 16, 2026
In a circular issued on May 15,… pic.twitter.com/D1jlOPbqXQ
छात्रों पर अतिरिक्त दबाव कम रखने के लिए CBSE ने फैसला किया है कि कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (R3) की अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इस भाषा का मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर आंतरिक परीक्षा के जरिए किया जाएगा। हालांकि, छात्रों के प्रदर्शन का उल्लेख CBSE प्रमाणपत्र में किया जाएगा।
बोर्ड ने यह भी साफ किया कि तीसरी भाषा के कारण किसी छात्र को कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा। इसके लिए नमूना प्रश्नपत्र और आंतरिक मूल्यांकन से जुड़े दिशा-निर्देश जल्द जारी किए जाएंगे।
CBSE ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 30 जून तक OASIS पोर्टल पर कक्षा 6 से 9 तक उपलब्ध तीसरी भाषा विकल्पों की जानकारी अपडेट करें।
जिन स्कूलों में भारतीय भाषाओं के योग्य शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, वहां अस्थायी व्यवस्था के तौर पर अन्य स्कूलों के साथ संसाधन साझा करने, ऑनलाइन या हाइब्रिड शिक्षण, सेवानिवृत्त भाषा शिक्षकों और योग्य स्नातकोत्तर शिक्षकों की मदद लेने की अनुमति दी गई है।
बोर्ड ने यह भी कहा कि दिव्यांग बच्चों (CwSN) को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के तहत आवश्यक छूट दी जाएगी। वहीं विदेश से लौटने वाले छात्रों को दो भारतीय भाषाएं पढ़ने की शर्त में विशेष मामलों के आधार पर राहत मिल सकती है।