साल 2018। पूरा परिवार उस समय सदमे में चला गया जब उन्हें पता चला कि महज कक्षा 6 की छात्रा अदृजा गण टी-सेल लिम्फोमा कैंसर से पीड़ित है। इसके अगले ढाई साल पूरे परिवार के लिए बेहद कठिन रहे। आज भी जब उस समय की याद आती है तो यह परिवार सिहर उठता है। हालांकि कैंसर जैसी मारक बीमारी भी अदृजा का हौसला नहीं तोड़ सका।
ढाई साल तक लगातार इलाज, 82 कीमोथेरेपी और नियमित फॉलो-अप के बावजूद अदृजा ने उच्च माध्यमिक परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। उसने 487 अंक प्राप्त कर राज्य में संयुक्त रूप से 10वां स्थान हासिल किया है। वह रामकृष्ण मिशन सारदा मिशन सिस्टर निवेदिता गर्ल्स स्कूल की छात्रा है।
अदृजा उत्तर 24 परगना जिले के निमता की रहने वाली है। माध्यमिक की परीक्षा में भी उसने 94 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। सफलता के लिए उसके संघर्ष, साहस और आत्मविश्वास ने उसे मिसाल बना दिया है।
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अपनी बेटी के संघर्षों के बारे में बताते हुए जयमंगल गण कहते हैं कि शुरुआत में उसका इलाज टाटा मेमोरियल अस्पताल में चल रहा था और बाद में टाटा कैंसर अस्पताल में उसका इलाज जारी रहा। टाकी हाउस गवर्नमेंट स्पॉन्सर्ड मल्टीपर्पस ब्वॉयज स्कूल में राजनीति विज्ञान के शिक्षक जयमंगल गण बताते हैं कि जून 2021 के बाद अदृजा का इलाज बंद हुआ।
हालांकि तब तक वह 82 कीमो ले चुकी थी। अभी भी अदृजा को साल में एक बार कोलकाता और साल में एक बार मुंबई के टाटा कैंसर अस्पताल में जांच के लिए नियमित रूप से जाना पड़ता है।
अदृजा की मां जयती गण बेलघरिया ब्वॉयज स्कूल की शिक्षिका हैं। दो बेटियों में अदृजा छोटी है। उनकी बड़ी बेटी जूलॉजी विषय में शोध कार्य कर रही है।
मीडिया से बात करते हुए अदृजा के पिता जयमंगल कहते हैं कि अदृजा को पढ़ने के लिए कभी नहीं कहना पड़ता है। बल्कि उसे कभी पढ़ाई छोड़कर थोड़ा घूमने के लिए ही कहना पड़ता है। वहीं मां ने अपनी बेटी की सबसे बड़ी खूबी और उसकी सबसे बड़ी ताकत उसकी दृढ़ इच्छाशक्ति को बताया।
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परिवार का कहना है कि जीवन के सबसे कठिन दौर में परिवार के साथ-साथ स्कूल ने भी उनका पूरा साथ दिया। स्कूल की शिक्षिकाओं का कहना है कि अदृजा बचपन से ही बेहद शांत, अनुशासित और आज्ञाकारी छात्रा रही है।
उच्च माध्यमिक में अदृजा ने कला विषयों से पढ़ाई की है। भविष्य में वह मनोविज्ञान विषय से पढ़ाई करना चाहती है। वह लोगों के मन, अवसाद और व्यवहार की विविधताओं पर काम करने की इच्छुक है। वह बेथुन कॉलेज में दाखिला लेना चाहती है। बांग्ला साहित्य में भी अदृजा की खूब रुची है। उसके पसंदीदा लेखक शरत चंद्र चट्टोपाध्याय है। खाली समय में उसे किताबें पढ़ना, गाना सुनना खूब भाता है।
अपने जैसी कठिन लड़ाई लड़ रहे लोगों के लिए अदृजा का संदेश बेहद प्रेरणादायक है। उसने कहा कि कोशिश करते रहिए, कोशिश ही सबसे बड़ी चीज है। उसने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, रिश्तेदारों, शिक्षकों के साथ-साथ अपने दोस्तों को भी दिया।