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गोंडा कुश्ती टूर्नामेंट में पीडब्ल्यूएल सितारों का जलवा, कई पहलवानों ने जीते पदक

सागर, यश तुषीर, नवीन और दीपक पूनिया ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत की ताकत बढ़ाई।

By शिखा सिंह

May 14, 2026 15:46 IST

गोंडा : उत्तर प्रदेश के गोंडा में 10 से 12 मई के बीच आयोजित सीनियर ओपन रैंकिंग कुश्ती टूर्नामेंट में प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) के पहलवानों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर अपनी छाप छोड़ी। पीडब्ल्यूएल के पांचवें सीजन में हिस्सा लेने वाले कई पहलवानों ने इस प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन किया और घरेलू कुश्ती सर्किट में लीग के प्रभाव को फिर साबित किया।

इस प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले पहलवान आगामी विश्व चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप के चयन ट्रायल के लिए पात्र बने हैं। ऐसे में पीडब्ल्यूएल से जुड़े पहलवानों का प्रदर्शन भारतीय कुश्ती के उच्च स्तरीय ढांचे में लीग की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

पीडब्ल्यूएल सीजन-5 के कई खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन के साथ पोडियम पर जगह बनाई। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि लीग खिलाड़ियों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ लगातार प्रतिस्पर्धा का अनुभव देती है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करने के बाद अब इन पहलवानों ने घरेलू स्तर पर भी अपनी क्षमता साबित की है।

पुरुष फ्रीस्टाइल वर्ग में यूपी डॉमिनेटर्स के पहलवान सागर ने 57 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता। वहीं महाराष्ट्र केसरी के पहलवान यश तुषीर ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 74 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

यश तुषीर की जीत को एक बड़ी वापसी के रूप में देखा जा रहा है। पूर्व विश्व जूनियर कांस्य पदक विजेता तुषीर ने दो साल पहले एशियन चैंपियनशिप में आखिरी बार अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला था। इसके बाद उन्हें घुटने, कंधे और पैर की अंगुली की चोटों से जूझना पड़ा। करीब छह महीने तक पुनर्वास प्रक्रिया से गुजरने के बाद उन्होंने गोंडा में शानदार वापसी की। उन्होंने स्वर्ण पदक जीतने के रास्ते में पांच प्रतिद्वंद्वियों को हराया और आगामी वैश्विक प्रतियोगिताओं के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर ली।

टाइगर्स ऑफ मुंबई दंगल्स के पहलवान नवीन ने 79 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। वहीं भारतीय कुश्ती के अनुभवी स्टार और पीडब्ल्यूएल सीजन-5 में महाराष्ट्र केसरी का प्रतिनिधित्व करने वाले दीपक पूनिया ने 92 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर अपने करियर में एक और उपलब्धि जोड़ ली।

महिला वर्ग में दिल्ली दंगल वॉरियर्स की पहलवान अंजलि ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उन्होंने 62 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर राष्ट्रीय टीम चयन प्रक्रिया से पहले अपनी संभावनाओं को मजबूत किया।

इन प्रदर्शनों ने एक बार फिर यह साबित किया कि प्रो रेसलिंग लीग भारतीय पहलवानों को दबाव की परिस्थितियों में लगातार बेहतर प्रदर्शन करने का मंच दे रही है। पीडब्ल्यूएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रमोटर अखिल गुप्ता ने कहा कि ओलंपियन, अंतरराष्ट्रीय स्टार, स्थापित भारतीय पहलवान और उभरती प्रतिभाओं को एक ही प्रतिस्पर्धी ढांचे में लाकर लीग ने देश में कुश्ती के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस वर्ष की शुरुआत में पीडब्ल्यूएल की सफल वापसी का असर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी दिखाई दिया। सीजन-5 में हिस्सा लेने वाले कई भारतीय और विदेशी पहलवानों ने लीग के बाद विभिन्न वैश्विक प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया।

जनवरी में नोएडा इंडोर स्टेडियम में आयोजित पीडब्ल्यूएल सीजन-5 ने एक बार फिर खुद को भारत की सबसे बड़ी ओलंपिक शैली की कुश्ती प्रतियोगिता के रूप में स्थापित किया। इस सीजन में छह फ्रेंचाइजी - टाइगर्स ऑफ मुंबई दंगल, हरियाणा थंडर्स, महाराष्ट्र केसरी, यूपी डॉमिनेटर्स, पंजाब रॉयल्स और दिल्ली दंगल वॉरियर्स ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शीर्ष पहलवानों ने भाग लिया और अंत में हरियाणा थंडर्स चैंपियन बना।

भारत की सबसे बड़ी ओलंपिक शैली की कुश्ती लीग प्रो रेसलिंग लीग राष्ट्रीय कुश्ती संस्थाओं के सहयोग से देश की कुश्ती व्यवस्था को मजबूत करने में लगातार अहम भूमिका निभा रही है। इसका असर इस तथ्य से भी समझा जा सकता है कि सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत के 17 पदकों में से 11 पदक पीडब्ल्यूएल से जुड़े पहलवानों ने जीते। इससे स्पष्ट है कि यह लीग भारतीय पहलवानों के लिए महाद्वीपीय और वैश्विक स्तर पर सफलता का महत्वपूर्ण मंच बन चुकी है।

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