कोलकाता : राज्य में नई सरकार अभी पूरी तरह व्यवस्थित भी नहीं हो पाई है लेकिन इसी बीच बंगाल के खेल जगत में अंदरूनी टकराव और खींचतान के आरोप सामने आने लगे हैं। एक बार फिर उंगलियां उठ रही हैं राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के छोटे भाई स्वपन बनर्जी पर जिन्हें खेल जगत में अधिकतर लोग बाबुन नाम से जानते हैं।
फिलहाल बंगाल के पुरुष टेबल टेनिस में सबसे सफल खिलाड़ी माने जा रहे हैं 19 वर्षीय अंकुर भट्टाचार्य। सीनियर स्तर पर वह इस समय देश में चौथे स्थान पर हैं जबकि विश्व रैंकिंग में भी उनका स्थान लगभग शीर्ष 100 के आसपास है। वर्ष 2028 के ओलंपिक में भारतीय टीम में जगह बनाने की दौड़ में उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है। इतना ही नहीं मौजूदा वर्ष में होने वाले एशियन गेम्स की भारतीय टीम में भी उनके चयन की संभावना जताई जा रही है।
ऐसे समय में बंगाल स्टेट टेबल टेनिस एसोसिएशन ने मंगलवार को अंकुर को हरियाणा की ओर से खेलने की अनुमति दे दी। इस संघ के अध्यक्ष स्वपन बनर्जी हैं और जारी किए गए अनुमति पत्र पर उनके ही हस्ताक्षर मौजूद हैं।
अंकुर को बंगाल से खेलने से क्यों मुक्त किया गया इस सवाल पर स्वपन बनर्जी ने कहा कि अंकुर के माता-पिता काफी समय से उनके पास नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट की मांग कर रहे थे। उनके अनुसार उन्होंने परिवार को समझाने की कोशिश की थी लेकिन जब वे अपनी मांग पर अड़े रहे तो अंततः उन्हें प्रमाणपत्र जारी करना पड़ा।
हालांकि अंकुर के पिता अंशुमान भट्टाचार्य ने इस दावे से अलग तस्वीर पेश की है। उनका आरोप है कि बंगाल टेबल टेनिस संघ के अधिकारियों का व्यवहार अंकुर के प्रति लगातार खराब रहा और इसी वजह से उन्हें बंगाल छोड़ने का निर्णय लेना पड़ा।
अंशुमान भट्टाचार्य के अनुसार पिछले महीने इंदौर में आयोजित राष्ट्रीय टेबल टेनिस प्रतियोगिता के पुरुष टीम इवेंट में बंगाल को फाइनल तक पहुंचाने में अंकुर की अहम भूमिका थी। टीम के अन्य खिलाड़ियों को 10-10 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी गई लेकिन अंकुर को यह राशि नहीं मिली। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य संघ हर मामले में उनके परिवार के साथ असहयोग कर रहा है।
जब स्वपन बनर्जी से पूछा गया कि अंकुर को पुरस्कार राशि क्यों नहीं दी गई तो वह इसका स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इस समय अंकुर इस्तांबुल में आयोजित डब्ल्यूटीटी फीडर प्रतियोगिता में हिस्सा लेने में व्यस्त हैं।
दरअसल बंगाल के टेबल टेनिस प्रशासन में इस समय भारी उथल-पुथल का माहौल बताया जा रहा है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि संघ की सचिव शर्मी सेनगुप्ता से लगभग दबाव बनाकर इस्तीफा लिया गया। लेकिन उनके पद छोड़ने के दो महीने बाद भी किसी नए सचिव की नियुक्ति नहीं की गई है।
स्थिति यह है कि संघ का कामकाज फिलहाल ऐसे लोग संभाल रहे हैं जो आधिकारिक ढांचे का हिस्सा नहीं माने जाते। आरोप यह भी है कि खिलाड़ियों की समस्याओं और हितों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
हाल ही में अल्टीमेट टीटी लीग में राष्ट्रीय रैंकिंग में तीसरे स्थान पर रहने वाले बंगाल के खिलाड़ी रणित भंज को कथित रूप से अनुचित तरीके से बाहर कर दिया गया। लेकिन इस मुद्दे पर भी बंगाल टेबल टेनिस संघ की ओर से कोई विरोध दर्ज नहीं कराया गया।
इन घटनाओं के बाद खिलाड़ियों और खेल जगत के भीतर नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। साथ ही बंगाल छोड़कर दूसरे राज्यों से खेलने की प्रवृत्ति भी अब तेज होती दिखाई दे रही है।