नई दिल्लीः केंद्र सरकार जल्द ही प्रस्तावित शांति अधिनियम यानी एसएचएएनटीआई एक्ट के नियम लागू करने की तैयारी में है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने बुधवार को कहा कि आने वाले कुछ सप्ताह या महीनों में इस कानून के नियम लागू कर दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के शोध, नवाचार और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार बड़े स्तर पर बदलाव कर रही है।
जितेंद्र सिंह “रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (आरडीआई) योजना” के तहत आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड के सेकंड लेवल फंड मैनेजर द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें उभरती प्रौद्योगिकी इकाइयों के साथ पहली बार समझौते और फंड जारी किए गए। मंत्री ने कहा कि अब सरकार ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जिसमें उद्योग जगत केवल निवेशक नहीं रहेगा, बल्कि शोध की प्राथमिकताएं तय करने और नवाचार के लिए फंडिंग तय करने में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।
क्या है शांति अधिनियम?
सरकार जिस “शांति अधिनियम” को लागू करने जा रही है, उसका उद्देश्य भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी और विदेशी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना है। इस कानून के जरिए परमाणु ऊर्जा उत्पादन से जुड़े नियमों में संशोधन किए जाएंगे ताकि निजी कंपनियां और विदेशी निवेशक भारत के परमाणु बिजली परियोजनाओं में अधिक सक्रिय रूप से शामिल हो सकें।
इस कानून का एक महत्वपूर्ण पहलू परमाणु संयंत्र संचालकों की जवाबदेही तय करना भी है। अब तक भारत में परमाणु दुर्घटना या तकनीकी गड़बड़ी की स्थिति में जिम्मेदारी और मुआवजे से जुड़े कई कानूनी सवाल स्पष्ट नहीं थे। प्रस्तावित शांति अधिनियम इन मुद्दों को स्पष्ट करने की दिशा में कदम माना जा रहा है। इसके जरिए परमाणु संयंत्र चलाने वाली एजेंसियों और निवेशकों के लिए कानूनी ढांचा अधिक स्पष्ट होगा, जिससे विदेशी कंपनियों का भरोसा भी बढ़ सकता है।
भारत-अमेरिका परमाणु समझौते को मिलेगा बल
सरकार का मानना है कि यह कानून भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की संभावनाओं को भी व्यवहारिक रूप से लागू करने में मदद करेगा। लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि भारत में कठोर जवाबदेही कानूनों और जटिल नियमों के कारण विदेशी कंपनियां परमाणु परियोजनाओं में निवेश को लेकर सतर्क रहती थीं। अब नए कानूनी प्रावधानों के जरिए इन बाधाओं को कम करने की कोशिश की जा रही है।
भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। फिलहाल देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता लगभग 8 से 9 गीगावॉट के बीच है। सरकार का कहना है कि शांति अधिनियम इस बड़े लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएगा।
उद्योगों को ज्यादा स्वतंत्रता देने की तैयारी
जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार अब पुरानी कार्यप्रणाली से आगे बढ़ रही है। पहले शोध परियोजनाओं के लगभग पूरा होने के बाद उद्योगों को जोड़ा जाता था, लेकिन अब शुरुआत से ही उद्योग जगत को योजना निर्माण में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योगों को यह स्वतंत्रता देना चाहती है कि वे खुद बताएं कि उन्हें सरकार से क्या अपेक्षाएं हैं और किस तरह का सहयोग चाहिए। मंत्री ने कहा कि शोध और नवाचार तभी सफल होंगे जब वे आर्थिक रूप से व्यावहारिक हों। उनके अनुसार कोई भी कारोबारी ऐसी परियोजना में निवेश नहीं करेगा, जिससे लाभ की संभावना न हो। इसलिए सरकार उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने पर जोर दे रही है।
मोदी सरकार ने पुरानी वर्जनाएं तोड़ीं
जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं जिन्हें पहले असंभव माना जाता था। उन्होंने कहा कि सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भी पांच वर्ष पहले बड़े सुधार किए थे, जिसके बाद निजी क्षेत्र की भागीदारी तेजी से बढ़ी। अब इसी तरह के बदलाव उभरती प्रौद्योगिकियों और परमाणु क्षेत्र में भी देखने को मिल रहे हैं।
क्वांटम तकनीक में भारत की प्रगति
कार्यक्रम में मंत्री ने राष्ट्रीय क्वांटम मिशन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत ने क्वांटम-सुरक्षित संचार के क्षेत्र में आठ वर्षों में 2000 किलोमीटर नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन चार साल से कम समय में ही लगभग 1000 किलोमीटर का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। उनके मुताबिक भारत अब उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जो क्वांटम तकनीक पर गंभीरता से काम कर रहे हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि विज्ञान और नवाचार से जुड़ी जानकारी को डिजिटल और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित माध्यमों के जरिए अधिक सरल और सुलभ बनाया जाना चाहिए, ताकि स्टार्टअप और शोधकर्ता आसानी से इन संसाधनों का उपयोग कर सकें।
आरडीआई फंड और डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा
कार्यक्रम के दौरान भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने कहा कि टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड को आरडीआई फंड के तहत एक विशेष शोध संगठन और सेकंड लेवल फंड मैनेजर के रूप में नामित किया गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत पांच डीप-टेक स्टार्टअप्स को पहले ही फंडिंग के लिए चुना जा चुका है और कई अन्य प्रस्तावों पर काम चल रहा है। अजय कुमार सूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 3 नवंबर 2025 को शुरू किए गए एक लाख करोड़ रुपये के आरडीआई कोष को केवल छह महीने के भीतर लागू कर दिया गया, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। सरकार का अनुमान है कि यह कोष निजी क्षेत्र से लगभग 10 गुना अधिक निवेश आकर्षित करेगा।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि भारत ने “क्वांटम-सेफ इकोसिस्टम फ्रेमवर्क” जारी किया है। इसके तहत भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग से उत्पन्न होने वाले साइबर खतरों से वित्तीय लेनदेन, स्वास्थ्य डेटा और बिजली ग्रिड जैसी महत्वपूर्ण प्रणालियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।