पटना : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक 2026 रद्द होने के बाद बिहार सरकार ने प्रश्नपत्र लीक मामले में कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है। बिहार के मंत्री श्रवण कुमार ने बुधवार को कहा कि मामले की जांच जारी है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और दोषियों को किसी भी हाल में छोड़ा नहीं जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने 3 मई को आयोजित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक 2026 को प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद रद्द कर दिया है।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के मुताबिक केंद्रीय एजेंसियों और कानून लागू करने वाली संस्थाओं से मिले इनपुट की जांच के बाद परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। इसी कारण परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया।
एजेंसी ने स्पष्ट किया कि मई 2026 परीक्षा के लिए अभ्यर्थियों द्वारा कराया गया पंजीकरण, परीक्षा केंद्र और अन्य विवरण दोबारा होने वाली परीक्षा के लिए मान्य रहेंगे। छात्रों को फिर से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी और उनसे कोई अतिरिक्त शुल्क भी नहीं लिया जाएगा।
परीक्षा रद्द होने के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को प्रेस वार्ता में कहा कि वर्ष 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद से अब तक 93 बार परीक्षा पत्र लीक की घटनाएं हो चुकी हैं। उनका दावा है कि इससे लगभग 6 करोड़ युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि सबसे ज्यादा प्रश्नपत्र लीक की घटनाएं भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात में हुई हैं। उन्होंने कहा कि हालिया राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक मामला राजस्थान से जुड़ा बताया जा रहा है, जिससे कई संदेह पैदा होते हैं।
उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश में युवाओं द्वारा किए गए आंदोलनों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वहां की युवा पीढ़ी सरकार बदल सकती है तो भारत के युवा भी प्रश्नपत्र लीक में शामिल लोगों को जेल भेज सकते हैं। उन्होंने युवाओं से सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने की अपील की।
केजरीवाल ने कहा कि दोषियों के नाम सामने लाकर उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए और इस “गंदे खेल” को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए व्यापक आंदोलन जरूरी है।
इस बीच केंद्र सरकार ने पूरे मामले की विस्तृत जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दी है। अब केंद्रीय एजेंसी प्रश्नपत्र लीक के आरोपों और उससे जुड़े नेटवर्क की गहराई से जांच करेगी।