नई दिल्ली: भारत ने मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को कथित समर्थन देने को लेकर चीन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा कि जो देश आतंकवादी ढांचे को बचाने की कोशिशों का समर्थन करते हैं, उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि इससे उनकी वैश्विक छवि और प्रतिष्ठा पर क्या असर पड़ता है।
विदेश मंत्रालय की यह कड़ी टिप्पणी उस समय सामने आई, जब मीडिया में ऐसी रिपोर्टें आईं कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव के दौरान चीन ने इस्लामाबाद को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई थी। यह सैन्य संघर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पैदा हुआ था।
मंगलवार को आयोजित विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि दुनिया इस बात पर नजर रख रही है कि बड़े और प्रभावशाली देश किस तरह के पक्ष के साथ खड़े होते हैं। हमने ऐसी रिपोर्टें देखी हैं जो पहले से मौजूद जानकारियों की पुष्टि करती हैं।” उन्होंने आगे कहा, “जो देश खुद को जिम्मेदार मानते हैं, उन्हें इस बात पर विचार करना चाहिए कि आतंकवादी ढांचे को बचाने की कोशिशों का समर्थन करने से उनकी प्रतिष्ठा और अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है।”
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कार्रवाई बताते हुए कहा कि यह सीमा पार से होने वाले आतंकवादी खतरों के खिलाफ एक सटीक और नियंत्रित जवाब था। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम में हुए आतंकी हमलों के जवाब में की गई एक सटीक, लक्षित और संतुलित सैन्य कार्रवाई थी। इसका उद्देश्य पाकिस्तान में और उसके समर्थन से संचालित आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था।”
नई दिल्ली की ओर से आया यह सख्त बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल ही में 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ मनाई गई। इस अभियान को आधुनिक युद्ध रणनीति का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना गया, जिसने दक्षिण एशिया में सैन्य संघर्ष की परिभाषा को बदलकर रख दिया।
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले के बाद हुई थी, जिसमें 26 नागरिकों को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया था। यह अभियान केवल जवाबी कार्रवाई नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित, बहु-स्तरीय और सर्जिकल सैन्य अभियान था, जो कुल 88 घंटे तक चला और जिसने क्षेत्रीय सैन्य समीकरणों को निर्णायक रूप से प्रभावित किया।
हालांकि, इस सैन्य सफलता की वर्षगांठ के साथ ही सीमा पार से दुष्प्रचार की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) की फैक्ट चेक यूनिट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रसारित किए जा रहे एक कथित वीडियो को लेकर चेतावनी जारी की है। इस वीडियो में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल की छवि का इस्तेमाल करते हुए झूठे दावे फैलाए जा रहे हैं। वीडियो में दावा किया गया कि भारत ने चार राफेल लड़ाकू विमान खो दिए और इसके बाद उसके पास पाकिस्तान की ओर पानी का प्रवाह रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
पीआईबी ने इन दावों को पूरी तरह फर्जी बताया है। फैक्ट चेक यूनिट ने स्पष्ट कहा, “यह वीडियो फर्जी है और डिजिटल तरीके से छेड़छाड़ कर बनाया गया है।” साथ ही यह भी कहा गया कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। गलत सूचनाओं का पर्दाफाश करने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पीआईबी ने विदेश मंत्रालय की वास्तविक प्रेस ब्रीफिंग का मूल वीडियो भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया है, ताकि लोग उसकी पुष्टि कर सकें।
भारतीय अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे इस तरह के संगठित दुष्प्रचार अभियानों से सावधान रहें, जिनका उद्देश्य भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाना है। फैक्ट चेक यूनिट ने कहा, “ऐसे छेड़छाड़ किए गए वीडियो पर विश्वास न करें। हमेशा आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी की पुष्टि करें।”
इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखाया है कि सैन्य तनाव के दौर में डीपफेक तकनीक और डिजिटल दुष्प्रचार का इस्तेमाल किस तरह मनोवैज्ञानिक अभियानों के लिए किया जा रहा है। भारत ने एक बार फिर दोहराया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति ‘शून्य सहनशीलता’ की है। अधिकारियों ने कहा कि केवल सरकारी और सत्यापित पोर्टलों से जारी जानकारी को ही सही माना जाना चाहिए, ताकि भारत की सैन्य क्षमता और उपलब्धियों को विदेशी दुष्प्रचार से प्रभावित न किया जा सके।