अगर आप दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (IGI International Airport) से होकर अक्सर आवाजाही करते हैं और एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक आने-जाने में लंबा समय लग जाता है? तो अब यात्रियों को एयरपोर्ट पर आवाजाही करने को लेकर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
एयरपोर्ट प्राधिकरण एक नई व्यवस्था पर काम कर रहा है। इसके तहत दो टर्मिनलों के बीच आवाजाही को तेज, आसान और कम तनावपूर्ण बनाने की कोशिश की जाएगी।
एयरपोर्ट प्राधिकरण की नई व्यवस्था में IGI अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के दो टर्मिनलों के बीच आवाजाही के लिए एयरसाइड पर विशेष बस सेवा शुरू करने की योजना है। इससे क्या मिलेगी सुविधा?
नई व्यवस्था के शुरू होने से यात्री बिना एक टर्मिनल से बाहर निकले ही दूसरे टर्मिनल तक पहुंच सकेंगे। प्राप्त जानकारी के अनुसार टर्मिनल 2 को एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन से जोड़ने के लिए एक अंडरग्राउंड वॉकवे (Underground Pedestrian Walkway) बनाने की योजना है। पर अचानक क्यों लिया गया यह फैसला?
Read Also | क्या होगा अगर बोर्डिंग गेट पार करने के बाद भी Flight में नहीं चढ़े आप? क्या भरना पड़ेगा जुर्माना या फिर....
बताया जाता है कि दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसकी वजह से वर्तमान ट्रांसफर सिस्टम पर दबाव बढ़ गया है। यात्रियों को अक्सर लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है या शहर के ट्रैफिक से गुजरकर बस से जाना पड़ता है, जिससे समय और असुविधा दोनों बढ़ जाती है।
एयरसाइड ट्रांसफर सिस्टम से बचेगा यात्रियों का समय
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी को माने तो दिल्ली एयरपोर्ट के अधिकारी टर्मिनल 1, 2 और 3 के बीच विशेष एयरसाइड बस कनेक्टिविटी शुरू करने की योजना बना रहे हैं। मौजूदा शटल सेवाओं के विपरीत, ये बसें सार्वजनिक सड़कों से नहीं गुजरेंगी, बल्कि एयरपोर्ट के प्रतिबंधित ऑपरेशनल ज़ोन के भीतर चलेंगी।
इससे यात्रियों को एयरपोर्ट परिसर से बाहर निकलने की जरूरत नहीं होगी और वे एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक आसानी से पहुंच भी सकेंगे। बताया जाता है कि यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल पर भी विचार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव को ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) के पास मंजूरी के लिए भेजा जा चुका है।
फिलहाल, पीक ऑवर्स में टर्मिनल 1 से टर्मिनल 3 तक आवाजाही करने में लगभग 30 मिनट तक ट्रैफिक में भी फंसने की आशंका होती है। वहीं टर्मिनल 2 और 3 के बीच आवाजाही में अक्सर लंबी पैदल दूरी तय करनी पड़ती है और बार-बार सुरक्षा जांच से गुजरना भी पड़ता है।
प्रस्तावित एयरसाइड सिस्टम से यात्रा समय और असुविधा दोनों के कम होने की संभावना जतायी जा रही है। यह सुविधा खासतौर पर उन यात्रियों के लिए बेहतर होगी जिनकी कनेक्टिंग फ्लाइट्स होती हैं।
Read Also | खुलने वाला है दुनिया का सबसे ऊंचा गुरुद्वारा 'हेमकुंड साहिब', कैसे पहुंचे?
अंडरग्राउंड वॉकवे जोड़ेगा मेट्रो से
दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल 2 को सीधे एयरपोर्ट मेट्रो स्टेशन से जोड़ने के लिए एक अंडरग्राउंड पैदल कॉरिडोर बनाया जा रहा है। फिलहाल मेट्रो से आवाजाही करने वाले यात्रियों को टर्मिनल 2 तक पहुंचने के लिए लगभग 750 मीटर की दूरी पैदल चलना पड़ता है। सामान के साथ भीड़भाड़ वाले इलाकों से गुजरना यात्रियों के लिए कई बार मुश्किल भरा होता है।
इस नई सुविधा के बनने के बाद यह दूरी घटकर लगभग 80 मीटर रह जाएगी। दावा किया जा रहा है कि इससे टर्मिनल तक पहुंचने में 5 मिनट से भी कम समय लगेगा। एयरपोर्ट के अधिकारियों का मानना है कि यह कॉरिडोर विशेष रूप से भीषण गर्मी, तेज बारिश और पीक आवर्स के दौरान भीड़ में आवाजाही करने में यात्रियों के लिए काफी राहत मिलेगा।