वाशिंगटन : संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत की प्राचीन गणितीय विरासत पर आधारित एक ऐतिहासिक प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि दुनिया में वैज्ञानिक प्रगति की कहानी को लंबे समय तक एक सीमित और संकीर्ण नजरिए से देखा गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इतिहास में मौजूद विकृतियों को सुधारना और विभिन्न सभ्यताओं के योगदान को उचित स्थान देना आज की आवश्यकता है।
‘फ्रॉम शून्य टू अनंत : भारतीय सभ्यता का गणित में योगदान’ नामक इस प्रदर्शनी का आयोजन संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सहयोग से किया है। यह प्रदर्शनी ‘SAMHiTA’ परियोजना का हिस्सा है जिसे भारत के विदेश मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है। जयशंकर ने सोमवार को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इससे पहले वह 2 से 10 मई तक जमैका, सूरीनाम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो की आधिकारिक यात्रा पर थे।
इस अवसर पर अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा, न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्यदूत बिनय प्रधान, प्रिंसटन विश्वविद्यालय के गणितज्ञ और फील्ड्स मेडल विजेता मंजुल भार्गव सहित कई राजनयिक और संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रदर्शनी में भारत में विकसित उन प्राचीन गणितीय अवधारणाओं को दर्शाया गया है, जिन्होंने बाद में पूरी दुनिया को प्रभावित किया। इनमें शून्य, दशमलव प्रणाली, बीजगणित, एल्गोरिद्म, खगोलीय गणना, संयोजन सिद्धांत, बाइनरी गणना, ज्यामिति तथा बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय शामिल हैं। साथ ही आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, भास्कराचार्य और केरल स्कूल ऑफ एस्ट्रोनॉमी एंड मैथमेटिक्स जैसे महान विद्वानों के योगदान को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है।
जयशंकर ने कहा कि आज की डिजिटल और तकनीकी दुनिया की बुनियाद रखने वाले कई सिद्धांत भारत में सदियों पहले विकसित किए गए थे। उन्होंने कहा कि तकनीक के लोकतंत्रीकरण के साथ इतिहास का लोकतंत्रीकरण भी जरूरी है, ताकि भविष्य की चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझा जा सके। उन्होंने कहा कि एआई के दौर में अतीत की सही समझ और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने कहा कि गणित मानवता को जोड़ने वाली सार्वभौमिक भाषा है। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा अपने ज्ञान को दुनिया के साथ साझा किया और “ओपन सोर्स” की भावना भारत में प्राचीन समय से मौजूद रही है। 11 से 15 मई तक चलने वाली यह प्रदर्शनी भारत की दो हजार वर्षों से अधिक पुरानी गणितीय परंपरा और उसके वैश्विक प्रभाव को दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रही है।