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अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान पर साधा निशाना, कहा- मध्यस्थता की भूमिका की हो पूरी समीक्षा

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पाकिस्तान की दोहरी नीति पर संदेह, ट्रंप प्रशासन में बढ़ा अविश्वास।

By रजनीश प्रसाद

May 12, 2026 15:36 IST

वाशिंगटन : अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में सामने आई रिपोर्टों के बाद अमेरिकी प्रशासन और नेताओं के बीच पाकिस्तान की निष्पक्षता को लेकर अविश्वास बढ़ गया है। आरोप है कि पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने चुपचाप ईरान की मदद की और उसके सैन्य विमानों को अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति दी।

अमेरिकी मीडिया संस्था सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार दो अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने ईरान का समर्थन किया जबकि दूसरी ओर वह अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की कोशिश भी करता रहा। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी हमलों से बचाने के उद्देश्य से ईरानी सैन्य विमानों को पाकिस्तान के एयरफील्ड का उपयोग करने दिया गया।

इसी मुद्दे पर अमेरिकी सीनेटर और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका की “पूरी तरह से समीक्षा” करने की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यदि ये रिपोर्ट सही हैं तो अमेरिका, ईरान और अन्य पक्षों के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता पर दोबारा गंभीर विचार होना चाहिए। ग्राहम ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कुछ रक्षा अधिकारियों के इजराइल को लेकर पहले दिए गए बयानों को देखते हुए उन्हें इन खबरों पर आश्चर्य नहीं होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम की घोषणा किए जाने के कुछ दिनों बाद तेहरान ने कई विमान पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस भेजे थे। इनमें ईरानी वायुसेना का आरसी-130 विमान भी शामिल था जिसका इस्तेमाल टोही और खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया जाता है।

हालांकि पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। वहीं, अफगानिस्तान के एक नागरिक उड्डयन अधिकारी ने सीबीएस न्यूज को बताया कि युद्ध शुरू होने से ठीक पहले ईरान की महान एयर का एक नागरिक विमान काबुल में उतरा था।

इन घटनाओं के बाद अमेरिका में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर संदेह और गहरा गया है। बताया जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान की ओर से आए जवाब को भी अस्वीकार कर दिया जिसे पाकिस्तान ने वाशिंगटन तक पहुंचाया था। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की मेजबानी भी की थी।

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप के करीबी कुछ लोग पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर चिंता जता रहे हैं। अमेरिकी प्रशासन को शक है कि पाकिस्तान, ईरान के साथ चल रही शांति प्रक्रिया पर ट्रंप की नाराजगी को सही तरीके से तेहरान तक नहीं पहुंचा रहा। कुछ अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान ने ईरान के रुख को वास्तविकता से अधिक सकारात्मक तरीके से अमेरिका के सामने पेश किया।

इन घटनाक्रमों के कारण अमेरिकी प्रशासन में पाकिस्तान के प्रति अविश्वास बढ़ता जा रहा है। वाशिंगटन का मानना है कि पाकिस्तान ईरान के सामने अमेरिका की स्थिति को मजबूती से नहीं रख रहा जिससे दोनों देशों के बीच शांति प्रयासों पर असर पड़ सकता है।

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