पश्चिम बंगाल के गृह विभाग की समन्वय शाखा की ओर से सोमवार (11 मई 2026) की शाम एक विज्ञप्ति जारी की गयी। इसमें विभिन्न बोर्डों, संगठनों और सरकारी संस्थाओं में नियुक्त नामित सदस्यों, निदेशकों और चेयरपर्सनों का कार्यकाल तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद स्कूल और उच्च शिक्षा से जुड़ी कई स्वशासित संस्थाओं के अध्यक्ष, चेयरपर्सन और सचिवों ने इस्तीफा देना शुरू कर दिया।
शिक्षा विभाग के ऑफिस विकास भवन सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार की दोपहर को शिक्षा सचिव विनोद कुमार के ऑफिस में स्कूल सेवा आयोग (SSC) के चेयरपर्सन सिद्धार्थ मजूमदार अपना इस्तीफा देने पहुंचे। उसी समय उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव राज्य सरकार की नई विज्ञप्ति लेकर वहां पहुंच गए।
इधर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य में कक्षा 11वीं–12वीं के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया फिलहाल जारी है। साथ ही 9वीं–10वीं के दस्तावेजों की जांच भी चल रही है। इसके अलावा गैर शिक्षाकर्मियों की नियुक्ति की लिखित परीक्षा भी हो चुकी है। करीब 16 लाख परीक्षार्थियों की OMR शीट फिलहाल SSC के ऑफिस में सीलबंद रखी हुई हैं।
Read Also | “हर बच्चे को पोषण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना जरूरी”: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
ऐसी स्थिति में SSC चेयरपर्सन के इस्तीफे के बाद शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया में जटिलताएं पैदा होंगी या नहीं, इसको लेकर चर्चा शुरू हो गई हैं। सोमवार को ही विकास भवन में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष रामानुज गंगोपाध्याय ने भी अपना इस्तीफा ईमेल के जरिए भेजा और उन्होंने अपना रिलीज ऑर्डर भी मांगा है। बताया जा रहा है कि आज, मंगलवार से रामानुज गंगोपाध्याय पश्चिम बंगाल राज्य विश्वविद्यालय के अध्यापक के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभालना चाहते हैं।
दूसरी तरफ 14 मई (गुरुवार) को उच्च माध्यमिक परीक्षा (Higher Secondary) का रिजल्ट आने वाला है जिसे लेकर प्रशासनिक अनिश्चितता बढ़ गई है। सरकार द्वारा नामित परिषद के अध्यक्ष पार्थ कर्मकार और सचिव प्रियदर्शिनी मल्लिक के इस्तीफे की स्थिति सामने आने के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि परिणामों की घोषणा कैसे होगी।
इसी मुद्दे पर शिक्षा अधिकारियों को परिषद की ओर से पत्र भेजा गया है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि इस्तीफे की स्थिति में रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया पर क्या असर पड़ेगा। सामान्यतः उच्च माध्यमिक के छात्रों की मार्कशीट पर परिषद के उप-सचिव (परीक्षा) के हस्ताक्षर होते हैं, लेकिन सफल छात्रों के प्रमाणपत्रों पर अध्यक्ष और सचिव के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। इस वर्ष ये प्रमाणपत्र पहले ही परिषद के उत्तर बंगाल, बर्धमान, कोलकाता और मेदिनीपुर क्षेत्रीय कार्यालयों तक पहुंच चुके हैं।
Read Also | UPSC सिविल सर्विसेज 2025: तीसरे प्रयास में अनुज अग्निहोत्री बने ऑल इंडिया टॉपर
इस साल उच्च माध्यमिक परीक्षा एक साथ तीन अलग-अलग स्वरूपों में आयोजित की गई थी। परीक्षा में बैठने वाले कुल परीक्षार्थियों की संख्या 7,10,811 थी।
कोलकाता जिला प्राथमिक विद्यालय परिषद के चेयरपर्सन कार्तिक मन्ना ने 8 मई को इस्तीफा दे दिया। इस बीच प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष गौतम पाल ने कहा है कि सरकारी विज्ञप्ति में केवल गैर-विधिक (non-statutory) बोर्डों के अध्यक्षों के पद से इस्तीफा या हटाने का प्रावधान है जबकि प्राथमिक शिक्षा बोर्ड एक विधिक (statutory) संस्था है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे कल्याणी यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ प्रोफेसर के रूप में वेतन प्राप्त करते हैं और बोर्ड व ज्वाइंट बोर्ड के चेयरपर्सन का अतिरिक्त दायित्व उन्हें सौंपा गया था। इसलिए वे फिलहाल सरकारी आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
गौरतलब है कि प्राथमिक स्तर पर शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी इस समय चल रही है।