कोलकाताः पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। इसका असर भारत पर भी पड़ रहा है, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल और गैस बाहर से मंगाता है। इस स्थिति के कारण पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों और उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से ईंधन का समझदारी से उपयोग करने की अपील की है। इससे न सिर्फ ईंधन बचेगा, बल्कि लोगों को सहूलियत होगी।
बड़े शहरों में ट्रैफिक की गंभीर समस्या
भारत के बड़े शहरों-दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पुणे और बेंगलुरु-में ट्रैफिक रोजमर्रा की बड़ी परेशानी बन चुका है। लाखों लोग रोज ऑफिस जाने और लौटने में घंटों सड़क पर फंसे रहते हैं। कई लोगों का कहना है कि उन्हें हर दिन 2 से 4 घंटे सिर्फ सफर में लग जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा जाम वाला शहर है, जहां लोग सालभर में औसतन 168 घंटे ट्रैफिक में गंवा देते हैं। इससे लोगों का समय ही नहीं, बल्कि उनकी ऊर्जा और मानसिक शांति भी प्रभावित होती है। मुंबई, कोलकाता में ही नहीं, देश के तमाम अन्य शहरों में भी लोगों की जिंदगी ट्राफिक में ही पिस रही है।
प्रदूषण और वर्क फ्रॉम होम की जरूरत
शहरों में बढ़ता ट्रैफिक वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण बन गया है। वाहनों से निकलने वाला धुआं शहरों की हवा को खराब कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, शहरी प्रदूषण में वाहनों का योगदान लगभग 27 प्रतिशत तक पहुंच गया है। ट्राफिक जाम में फंसे वाहन ज्यादा देर तक चलते हैं, जिससे प्रदूषण और बढ़ जाता है। इसी समस्या को देखते हुए वर्क फ्रॉम होम को एक अच्छे विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। आईटी, बैंकिंग और कॉर्पोरेट सेक्टर के कई कर्मचारी मानते हैं कि अगर काम घर से हो सकता है, तो रोजाना लंबा सफर जरूरी नहीं है।
अनुमान के मुताबिक, एक कर्मचारी घर से काम करके हर हफ्ते 3 से 5 लीटर पेट्रोल बचा सकता है। अगर यह व्यवस्था बड़े स्तर पर लागू हो जाए, तो देश में ईंधन की खपत और प्रदूषण दोनों कम हो सकते हैं।
पीएम मोदी की अपील और वर्क फ्रॉम होम पर चर्चा
हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से ईंधन का समझदारी से उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो, वहां स्कूलों, कॉलेजों और दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड मॉडल अपनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि निजी वाहनों का कम उपयोग किया जाए, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिले और कारपूलिंग जैसी व्यवस्था को अपनाया जाए।
कोविड-19 महामारी के दौरान भारत में वर्क फ्रॉम होम बड़े स्तर पर शुरू हुआ था। उसके बाद से यह मॉडल धीरे-धीरे मजबूत हुआ है। 2025 के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 53 प्रतिशत कंपनियां हाइब्रिड मॉडल अपना चुकी हैं और करीब 30 प्रतिशत कर्मचारी इसे पसंद करते हैं।
हालांकि यह भी सच है कि हर काम घर से नहीं किया जा सकता। कुछ नौकरियों में ऑफिस जाना जरूरी है। साथ ही घर से काम करने में बिजली, इंटरनेट और डिजिटल सिस्टम पर निर्भरता भी बढ़ जाती है। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सही तरीके से योजना बनाई जाए, तो हाइब्रिड वर्क मॉडल शहरों में ट्रैफिक कम करने, प्रदूषण घटाने और लोगों की जिंदगी आसान बनाने में मदद कर सकता है।
आज शहरों में रहने वाले लोग एक ही समय में कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं-लंबा ट्रैफिक, बढ़ता प्रदूषण और महंगाई की मार। ऐसे में वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड मॉडल सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि एक संभावित समाधान के रूप में सामने आ रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार, कंपनियां और समाज मिलकर इस बदलाव को कितना आगे बढ़ा पाते हैं।