नई दिल्लीः वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर मजबूत स्थिति का दावा किया है। सरकार के अनुसार देश के पास वर्तमान में लगभग 60 दिन का क्रूड ऑयल, 60 दिन का प्राकृतिक गैस और 45 दिन का LPG का रोलिंग स्टॉक मौजूद है, जो किसी भी संभावित आपूर्ति संकट से निपटने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि भारत फिलहाल ऊर्जा संकट से सुरक्षित है, लेकिन वैश्विक बाजार की अस्थिरता को देखते हुए सतर्कता और बचत बेहद जरूरी है।
सरकारी आकलन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण भारतीय तेल विपणन कंपनियां हर दिन लगभग ₹1000 करोड़ रुपये का बोझ उठा रही हैं, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं पर महंगाई का सीधा असर न पड़े। इसी वजह से पहली तिमाही में कुल आर्थिक दबाव करीब ₹2 लाख रुपये करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
सरकार ने बताया कि भारत इस समय दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल रिफाइनर और चौथा सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक देश है, जो 150 से अधिक देशों को ईंधन आपूर्ति करता है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण वित्तीय संतुलन पर दबाव बढ़ रहा है।
इसी स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने नागरिकों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने, कारपूलिंग बढ़ाने और अनावश्यक विदेशी यात्रा से बचने की अपील की है। साथ ही उन्होंने एक वर्ष तक गैर-जरूरी सोना खरीद से बचने का भी सुझाव दिया है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके।
सरकार का कहना है कि ऊर्जा बचत केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं बल्कि “राष्ट्रीय जिम्मेदारी” है, जिससे देश की मुद्रा स्थिरता और विकास परियोजनाओं पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
इसके साथ ही किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने, रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कमी लाने और सोलर पंप जैसे वैकल्पिक ऊर्जा साधनों को बढ़ावा देने की भी सलाह दी गई है। बैठक में यह भी बताया गया कि सरकार ने उद्योगों और एमएसएमई सेक्टर के लिए ₹2.55 लाख करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना को मंजूरी दी है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद मिलेगी।