नई दिल्ली : महाराष्ट्र से ओमान होते हुए भारत लौटते हुए छह महीनों में 3500 किलोमीटर की यात्रा पूरी करने वाली समुद्री कछुआ धवल लक्ष्मी की कहानी अद्भुत है। जाल में फंसकर गंभीर रूप से घायल होने पर जिनकी बचने की उम्मीद लगभग नहीं थी इस ऑलिव रिडली कछुए ने न सिर्फ पूरी तरह स्वस्थ होकर जीवित रहने का चमत्कार किया बल्कि पुनर्वास के छह महीने बाद भारत से ओमान तक पहुंचकर वापस भारत की ओर लौटने की लंबी समुद्री यात्रा भी पूरी की। वैज्ञानिकों के अनुसार इस अवधि में धवल लक्ष्मी ने कुल 3500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की।
धवल लक्ष्मी का सफर अगस्त 2024 में शुरू हुआ था। उस समय महाराष्ट्र के दहानु तट के पास एक मछली पकड़ने के जाल में यह कछुआ फंस गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन एंड एनिमल वेलफेयर एसोसिएशन (डब्ल्यूसीएडब्ल्यूए) के कछुआ बचाव केंद्र में ले जाया गया। केंद्र दहानु में ही स्थित है। जब धवल लक्ष्मी को लाया गया तब उसके दोनों अगली पंखियाँ गंभीर रूप से घायल थी और उसकी हालत इतनी नाजुक थी कि चिकित्सकों ने शुरू में अनुमान लगाया कि उसे बचाना संभव नहीं होगा।
लेकिन विशेषज्ञों ने उम्मीद नहीं छोड़ी, कई महीनों की उपचार प्रक्रिया के बाद कछुआ पूरी तरह स्वस्थ हो गया। इसी दौरान महाराष्ट्र के दिवंगत वन्यजीव कार्यकर्ता धवल कंसर के सम्मान में इसका नाम धवल लक्ष्मी रखा गया। उसकी कछुए की खोल में वैज्ञानिकों ने एक छोटा सैटेलाइट ट्रैकर लगाया ताकि उसकी समुद्री यात्रा पर नजर रखी जा सके। फिर 20 नवंबर 2025 को धवल लक्ष्मी को वापस अरब सागर में छोड़ दिया गया।
लेकिन इसके बाद जो हुआ वह वैज्ञानिकों के लिए भी चौंकाने वाला था। अधिकांश टैग वाले ऑलिव रिडली कछुए आमतौर पर भारत के पश्चिमी तट के पास ही रहते हैं। लेकिन धवल लक्ष्मी जैसे ही समुद्र में छोड़ा गया, वह गहराई में जाकर आगे बढ़ने लगा। जनवरी में ट्रैकर ने दिखाया कि यह भारत के तट से 700 किलोमीटर दूर तक पहुंच चुका था। फरवरी में वैज्ञानिकों ने आश्चर्यचकित होकर देखा कि यह ओमान के मसीराह द्वीप के पास महीसोपान क्षेत्र में था जो भारत से सिर्फ 160 किलोमीटर की दूरी पर है।
विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया कि लक्ष्मी संभवतः उस क्षेत्र की ओर जाएगी, जहाँ कछुए अपने अंडे देते हैं। लेकिन धवल लक्ष्मी ने फिर चौंकाने वाला कदम उठाया—उसे दिशा बदलकर सीधे भारत की ओर लौटना शुरू किया।
डब्ल्यूसीएडब्ल्यूए के अनुसार, नवंबर–दिसंबर के दौरान महाराष्ट्र में टैग किए गए आठ कछुओं में केवल धवल लक्ष्मी ही ऐसा कछुआ था, जिसे पहले गंभीर चोटों से उबारने के लिए उपचारित करना पड़ा। वही कछुआ, जिसे मछली पकड़ने के जाल में फंसा देखकर बचाया गया था, समुद्र में छोड़ने के बाद सबसे दूर तक और गहराई में जाकर साहसिक यात्रा पर निकला। बाकी सात कछुए अधिकतर महाराष्ट्र के तट के पास ही घूमते रहे।
वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के कछुआ विशेषज्ञ दिनेश विन्हेकर ने कहा कि धवल लक्ष्मी का पूरी तरह स्वस्थ होकर लंबी समुद्री यात्रा करना और फिर भारत लौटना भारत के वन्यजीव संरक्षण में एक बड़ी सफलता है। लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि “अब तक केवल बहुत कम कछुओं की यात्रा ट्रैक की गई है इसलिए गहरे समुद्र में उनके व्यवहार और यात्रा के बारे में हमारी जानकारी सीमित है।”
25-30 किलो वजन वाले एक ऑलिव रिडली कछुए का पहले मृत्यु के मुंह से लौटकर फिर अरब सागर की विशाल जलराशि में 3500 किलोमीटर की यात्रा करना वैज्ञानिकों के लिए धैर्य और जीवित रहने की अद्भुत क्षमता का उदाहरण है। ठीक वैसे ही जैसे कुछ महीने पहले तीन छोटे अमूर फाल्कन ने केवल 150 ग्राम वजन के शरीर के साथ भारत से सोमालिया तक लगभग 5000 किलोमीटर की दूरी चार दिनों में तय की थी। इसने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्रकृति की रहस्यमयी शक्तियों को विज्ञान अभी पूरी तरह समझ नहीं पाया है।