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किसान आत्महत्या 2024: देश में गिरावट, कर्नाटक में भयावह वृद्धि

एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि पूरे भारत में 10,546 किसानों ने आत्महत्या की

बेंगलुरु : केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीनस्थ नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार 2024 में पूरे देश में किसानों और अनुबंध आधारित कृषि श्रमिकों की आत्महत्याओं की संख्या 10,546 रही। इसका अर्थ है कि प्रतिदिन औसतन 28 किसान और कृषि श्रमिक आत्महत्या करने के लिए मजबूर हुए। हालांकि 2023 में यह संख्या 10,786 थी यानी देश में एक वर्ष में 2.22 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

लेकिन यह संतोषजनक नहीं है। कर्नाटक में किसानों की आत्महत्याओं की दर में भयंकर वृद्धि हुई है। 2023 में कर्नाटक में 2,423 किसानों ने आत्महत्या की थी वही 2024 में यह संख्या बढ़कर 2,971 हो गई। इसका अर्थ है कि सिद्धारमैया के नेतृत्व वाले कर्नाटक में एक साल में किसानों की आत्महत्या 22.61 प्रतिशत बढ़ी। देश में किसानों की आत्महत्याओं के मामले में महाराष्ट्र अभी भी शीर्ष पर है। 2023 में महाराष्ट्र में 4,151 किसानों ने आत्महत्या की थी जबकि 2024 में यह संख्या घटकर 3,824 रह गई।

सारा भारत किसान सभा के महासचिव बिजु कृष्णन का कहना है इस रिपोर्ट में उन किसानों की आत्महत्याओं को शामिल नहीं किया गया है जो अपने राज्य में खेती करने में असफल होने और आर्थिक तंगी के कारण प्रवासी मजदूर बनकर दूसरे राज्य चले जाते हैं और वहां रोजगार न मिलने पर आत्महत्या कर लेते हैं। सरकारी आंकड़ों का यह खेल देश के किसानों की वास्तविक समस्याओं और उनके कष्ट को छिपा नहीं सकता। कुल मिलाकर जबकि देशभर में आत्महत्याओं की संख्या में मामूली गिरावट आई है कर्नाटक जैसे राज्यों में यह गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है और प्रवासी किसानों की समस्याओं को अब तक सरकारी आंकड़ों में सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया है।

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