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चंद्रनाथ रथ हत्याकांड : 'डिजिटल' फुटप्रिंट ने करवायी पहचान, अन्य राज्य से 3 संदिग्ध अभियुक्त गिरफ्तार!

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सहायक की हत्या करने के लिए ही दूसरे राज्य से अपराधी बंगाल में आए थे, यह निश्चित होते ही दो टीम को उत्तर प्रदेश और बिहार भेजा गया।

By Elina Dutta, Moumita Bhattacharya

May 11, 2026 09:59 IST

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्याकांड मामले में 3 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तीनों अभियुक्तों को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया है। क्या ये तीनों इस हत्याकांड में सीधे तौर पर शामिल थे? क्या डिजिटल फुटप्रिंट की मदद से ही इन तीनों अभियुक्तों की गिरफ्तारी संभव हो सकी है? क्या तीनों दागी अपराधी अथवा शार्प शूटर हैं?

अगर आपके मन में भी ये सवाल घूम रहे हैं तो जवाब संभवतः हां में ही हो।

मिली जानकारी के अनुसार तीनों अभियुक्तों को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया है। इनमें से एक बक्सर (बिहार) का निवासी और बाकी दोनों उत्तर प्रदेश निवासी बताएं जाते हैं। संभावना जतायी जा रही है कि चंद्रनाथ हत्याकांड में जिन शार्प शूटरों के शामिल होने की आशंका जतायी जा रही थी, वह ये तीनों ही हैं।

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गत 6 मई 2026 को चंद्रनाथ रथ की मध्यमग्राम में गोली मारकर नृशंस हत्या कर दी गयी थी। इसके बाद जांच की जिम्मेदारी पुलिस के स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) को सौंपी गयी। प्राथमिक जांच में ही दूसरे राज्य की बात सामने आयी।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सहायक की हत्या करने के लिए ही दूसरे राज्य से अपराधी बंगाल में आए थे, यह निश्चित होते ही दो टीम को उत्तर प्रदेश और बिहार भेजा गया। उन दोनों टीमों ने ही तीनों संदेहास्पद अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक अभियुक्त का नाम विशाल श्रीवास्तव है जो बक्सर के पंडियापट्टी का रहने वाला बताया जाता है। अधिकारियों का मानना है कि इनसे पूछताछ के बाद ही चंद्रनाथ हत्याकांड की उलझी सारी गुत्थियों को सुलझाया जा सकेगा। प्राथमिक अनुमान में बताया गया कि अपराधियों की संख्या कम से कम 8 थी। रेकी करने के बाद चंद्रनाथ रथ की हत्या की योजना बनायी गयी थी।

बुधवार की रात को मध्यमग्राम के दोहारिया इलाके में पहले सफेद रंग की एक गाड़ी ने चंद्रनाथ रथ की गाड़ी का रास्ता रोका। मध्यमग्राम के उस व्यस्त सड़क पर दोनों तरफ से घेर कर फिल्मी अंदाज में महज 45 सेकेंड में चंद्रनाथ को गोलियों से छलनी कर दिया गया था।

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हत्याकांड को अंजाम देकर एक लाल रंग की गाड़ी और एक बाइक पर सवार होकर शूटर भाग खड़े हुए थे। अपना परिचय छिपाने के लिए अपराधियों ने काफी सोच-समझकर योजना बनायी थी। लेकिन सिर्फ एक गलती ने उनके सारे किए-धरे पर पानी फेर दिया।

'डिजिटल फुटप्रिंट' के माध्यम से जांच अधिकारियों ने अभियुक्तों को धर-दबोचा। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हत्याकांड से पहले, हत्या में इस्तेमाल की गई निसान माइक्रा (Nissan Micra) कार बाली टोल प्लाज़ा से गुजरी थी।

उस समय टोल का भुगतान नकद में नहीं बल्कि UPI के जरिए कार में मौजूद एक अभियुक्त ने किया था। इसी डिजिटल लेनदेन के आधार पर पुलिस को अभियुक्त की पहचान और मोबाइल नंबर मिला। उसी सुराग के जरिए जांच दल ने दूसरे राज्य में जाकर संदिग्धों को पकड़ा।

बाली टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज में दिख रही कार और उसमें सवार लोगों की तस्वीरों का भी अभियुक्तों के चेहरों से मिलान किया जा रहा है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि अभियुक्तों ने चंद्रनाथ की हत्या किन लोगों के इशारे और कहने पर की थी।

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