नयी दिल्लीः लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए सात सुझावों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि ये बातें किसी उपदेश की तरह नहीं, बल्कि सरकार की नाकामियों का प्रमाण हैं।
राहुल गांधी ने अपने बयान में प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि अब देश चलाना उनके नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए हर बार आम लोगों पर बोझ डाल देती है।
कांग्रेस सांसद ने लिखा कि प्रधानमंत्री ने जनता से त्याग करने की अपील की है और सोना कम खरीदने, विदेश यात्राओं से बचने, पेट्रोल की खपत घटाने, खाद और खाद्य तेल का सीमित उपयोग करने, मेट्रो का इस्तेमाल बढ़ाने और घर से काम करने जैसी बातें कही गईं। राहुल गांधी के अनुसार यह स्थिति बताती है कि पिछले 12 वर्षों में देश को ऐसे मोड़ पर पहुंचा दिया गया है, जहां नागरिकों को यह तक बताया जा रहा है कि क्या खरीदना चाहिए, क्या नहीं, कहां जाना चाहिए और कहां नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार खुद जवाबदेही से बचने के लिए सारी जिम्मेदारी लोगों पर डाल रही है।
इससे पहले रविवार को मोदी ने सिकंदराबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयात पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि हर परिवार यदि खाद्य तेल का उपयोग कम करे और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़े तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि खाद्य तेल के आयात पर देश को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। उनके मुताबिक यदि हर घर तेल की खपत घटाए तो यह देशभक्ति की दिशा में बड़ा योगदान होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इससे एक ओर सरकारी खजाने पर दबाव कम होगा, वहीं दूसरी ओर लोगों के स्वास्थ्य को भी फायदा पहुंचेगा।
रासायनिक उर्वरकों के मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत बड़ी मात्रा में रासायनिक खाद विदेशों से खरीदता है, जिस पर काफी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। किसानों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल आधा करने और प्राकृतिक खेती अपनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और खेती की जमीन के साथ-साथ धरती मां की भी रक्षा हो सकेगी।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने देशभक्ति की नई व्याख्या भी प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में देशभक्ति केवल सीमा पर जान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा के जीवन में जिम्मेदार व्यवहार अपनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के कारण बढ़ती महंगाई का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियां केवल सरकार की चुनौती नहीं, बल्कि पूरे देश की सामूहिक परीक्षा हैं। ईंधन की बढ़ती कीमतों और आयात पर निर्भरता को देखते हुए प्रधानमंत्री ने नागरिकों से सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जहां संभव हो वहां मेट्रो और अन्य सार्वजनिक साधनों का इस्तेमाल किया जाए, निजी वाहन की जरूरत पड़ने पर कार-पूलिंग अपनाई जाए, माल ढुलाई के लिए रेल परिवहन को प्राथमिकता दी जाए और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए।