मुंबईः वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर राहत भरी तस्वीर सामने आई है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर करीब 7.2 प्रतिशत रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू मांग की मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था को लगातार सहारा दे रही है।
SBI ने पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। हालांकि अगले वित्त वर्ष 2026-27 में वैश्विक परिस्थितियों के कारण विकास दर में कुछ नरमी आने की संभावना भी व्यक्त की गई है।
ग्रामीण और शहरी खपत से मिला अर्थव्यवस्था को सहारा
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों की मजबूती के कारण खपत लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर, शहरी क्षेत्रों में भी त्योहारी सीजन के बाद मांग स्थिर बनी हुई है। सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं और खर्च बढ़ने से उपभोक्ता गतिविधियों को मजबूती मिली है।
SBI का कहना है कि हाई-फ्रीक्वेंसी डेटा में चौथी तिमाही के दौरान कुछ नरमी जरूर दिखाई दी, लेकिन कुल मिलाकर आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं।
नाममात्र GDP ग्रोथ भी मजबूत रहने का अनुमान
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में भारत की नाममात्र (Nominal) GDP वृद्धि दर करीब 12.2 प्रतिशत रह सकती है। वहीं अगले वित्त वर्ष 2026-27 में यह लगभग 11 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसमें करीब 4.5 प्रतिशत के डिफ्लेटर को शामिल किया गया है।
FY27 में विकास दर थोड़ी धीमी पड़ सकती है
SBI रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर लगभग 6.6 प्रतिशत रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया समेत दुनिया के कई हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनावों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, जिसका प्रभाव भारत पर भी दिखाई दे सकता है।
हालांकि बैंक ने यह भी कहा कि आने वाले समय में नए आंकड़ों और परिस्थितियों के आधार पर इन अनुमानों में बदलाव संभव है।
IMF ने भी भारत की वृद्धि दर को लेकर जताया भरोसा
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने हाल ही में वर्ष 2026 के लिए वैश्विक विकास दर का अनुमान घटाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और सप्लाई चेन में रुकावट को इसकी प्रमुख वजह माना गया है।
इसके विपरीत IMF ने भारत के लिए विकास दर अनुमान को बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग भारत की अर्थव्यवस्था को वैश्विक सुस्ती से काफी हद तक बचाए हुए है।
महंगाई और तेल कीमतें बनी चुनौती
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव महंगाई पर दबाव बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा संभावित एल-नीनो परिस्थितियां भी खाद्य मुद्रास्फीति को प्रभावित कर सकती हैं।
हालांकि अच्छी रबी फसल के कारण खाद्यान्न आपूर्ति मजबूत रहने की उम्मीद है, जिससे महंगाई पर कुछ हद तक नियंत्रण बना रह सकता है।
RBI की भूमिका पर भी नजर
SBI रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) तरलता प्रबंधन को लेकर सक्रिय बना हुआ है। जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बैंक बाजार में हस्तक्षेप कर आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की कोशिश करेगा।
रिपोर्ट का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की घरेलू मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। यही वजह है कि दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती के बीच भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहा है।