मुंबई : भारतीय शेयर बाजार में पिछले दो कारोबारी सत्रों से फिर से उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। शुक्रवार को सेंसेक्स 516 अंक और निफ्टी50 151 अंक गिरकर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में भी बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर दलाल स्ट्रीट पर साफ दिखाई दे सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगले सप्ताह पांच बड़े फैक्टर सेंसेक्स और निफ्टी50 की दिशा तय करेंगे। इनमें पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे शामिल हैं। निवेशकों को बाजार में पैसा लगाने से पहले इन सभी संकेतकों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव बाजार की सबसे बड़ी चिंताओं में शामिल हो गया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव और तेज हो गया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका समर्थित प्रस्ताव को ईरान ने खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि यह प्रस्ताव पक्षपातपूर्ण है और इससे मौजूदा संकट का समाधान नहीं होगा। तेहरान ने साफ कहा है कि तनाव कम करने के लिए संघर्ष रोकना होगा उसके बंदरगाहों से नाकेबंदी हटानी होगी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य जहाज संचालन बहाल करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 101.29 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। दिन के दौरान इसमें करीब 3 प्रतिशत तक उछाल देखा गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड का दाम बढ़कर 95.42 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी ने कहा कि यदि ब्रेंट क्रूड 94 से 99 डॉलर प्रति बैरल के बीच बना रहता है तो यह बाजार के लिए महत्वपूर्ण मैक्रो फैक्टर होगा। उन्होंने कहा कि अगर तेल की कीमत 90 डॉलर से नीचे आती है या पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है तो बाजार में राहत की तेजी देखी जा सकती है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने से देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ता है।
आने वाले सप्ताह में जनवरी-मार्च तिमाही के नतीजों का भी बाजार पर बड़ा असर पड़ेगा। 400 से ज्यादा कंपनियां अपने चौथी तिमाही के नतीजे जारी करेंगी। इनमें केनरा बैंक, इंडियन होटल्स, डिक्सन टेक्नोलॉजीज, भारती एयरटेल, टाटा मोटर्स, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, आईआरएफसी और हिंदुस्तान कॉपर जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों के नतीजों से कई शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है। शुक्रवार को रुपया 25 पैसे टूटकर 94.47 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 94.68 तक कमजोर हो गया था। रुपये की गिरावट से आयात महंगा होता है और विदेशी निवेशकों का भरोसा भी प्रभावित हो सकता है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली भी बाजार पर दबाव बना रही है। 8 मई को एफआईआई ने भारतीय बाजार में 4,111 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 6,748 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इस साल अब तक एफआईआई कुल 2.50 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं, जबकि डीआईआई ने 3.11 लाख करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं।
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