लंदन : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति संकट के बीच ब्रिटेन ने अपना अत्याधुनिक युद्धपोत एचएमएस ड्रैगन हॉर्मुज जलडमरूमध्य की ओर भेजने का फैसला किया है। यह ब्रिटिश टाइप-45 युद्धपोत गाइडेड मिसाइलों को नष्ट करने की क्षमता रखता है और यूरोपीय संघ के रक्षात्मक नौसैनिक मिशन का हिस्सा होगा।
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद दिखाई दे रही थी लेकिन समय के साथ हालात फिर से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बाधित होने की स्थिति में पहुंच गया है जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है। एशिया के साथ-साथ यूरोप के कई देश भी ईंधन संकट से प्रभावित हो रहे हैं।
अब तक यूरोपीय संघ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध के बावजूद पश्चिम एशिया में सैन्य सहायता भेजने से दूरी बनाए रखी थी लेकिन ऊर्जा आपूर्ति में लगातार आ रही बाधाओं को देखते हुए यूरोपीय देशों ने रक्षात्मक नौसैनिक मिशन शुरू करने का फैसला किया है।
इस मिशन के तहत कई एस्कॉर्ट जहाज हॉर्मुज क्षेत्र में तैनात किए जाएंगे जिनका मुख्य उद्देश्य ईंधन लेकर जाने वाले जहाजों को सुरक्षित तरीके से जलडमरूमध्य पार कराना होगा। इसी अभियान में ब्रिटेन का एचएमएस ड्रैगन भी शामिल हो रहा है जिसे आधुनिक मिसाइल रोधी क्षमता के लिए जाना जाता है।
दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि उसकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण ईरान से ईंधन लेकर जाने वाले 58 वाणिज्यिक जहाजों को अपना रास्ता बदलने पर मजबूर होना पड़ा है। इससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य नहीं हुई तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर और अधिक गहरा हो सकता है।